आजकल के समय में लोगों में तनाव, सप्ताह में चार-पांच बार बाहर का खाना, नींद नहीं आना और खराब फिटनेस जैसे कारणों से हृदय रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। यही नहीं ये समस्या अब युवाओं में भी देखने को मिल रही है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर सौरभ नागर ने बताया कि कॉलेज की हृदय रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले रोगियों में पचास फीसद युवा हैं। कैथ लैब में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी करवाने वाले हर तीसरे रोगी की उम्र भी तीस साल से कम है। इसकी बड़ी वजह देर रात तक जागना, कंप्यूटर व मोबाइल चलाना, नौकरी, कैरियर का तनाव, धूम्रपान, एल्कोहल का अधिक सेवन, अनियमित खानपान है।
डॉक्टर सौरभ ने बताया कि अगर कोई सप्ताह में चार-पांच बार बाहर का भोजन करता है तो ऐसे लोगों में हार्ट अटैक का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है। इसका कारण है बाहर का भोजन का बार बार तेल को गर्म करके पकाना जिसके चलते ये तेल जहर के समान हो जाता है। इस तेल में पकी सामग्री के इस्तेमाल से हृदय की नसें संकुचित होने लगती हैं।
पूर्व चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर युवराज सिंह ने बताया कि हृदय रोग से बचने के लिए धूम्रपान व मद्यपान से बचें। अगर पास में कोई धूम्रपान कर रहा है तो मास्क लगा लें। बाजार के भोजन और फास्ट फूड की लत नहीं लगाएं बल्कि घर में बना ताजा व शुद्ध पौष्टिक भोजन लें। मोटा अनाज, दाल, हरी सब्जी, सलाद, फल ज्यादा से ज्यादा खाएं। रात में आठ बजे से पहले भोजन कर लें और सात-आठ घंटे की नींद लें। डॉक्टर की सलाह से नियमित व्यायाम, योग, प्राणायाम करें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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