* सुस्पष्ट हृदय रेखा होने से जातक शांत और सरल स्वभाव का होता है, जबकि जंजीरनुमा हृदय रेखा जातक के चरित्र को खराब कर सकती है।
* बृहस्पति पर्वत के पास अगर हृदय रेखा दो शाखाओं में विभाजित होकर एक शाखा सबसे बड़ी अंगुली के नीचे शनि पर्वत पर और दूसरी शाखा बृहस्पति पर्वत पर चली जाए तो जातक के जीवन में उन्नति और आर्थिक समृद्धि देखने को मिलती है।
* टूटी या जगह जगह से कटी हुई हृदय रेखा जातक को मानसिक रोगी और प्रेम में असफल बना सकती है, वहीं अगर हाथ में हृदय रेखा नहीं हो तो जातक को कम उम्र में ही हृदय रोगी बना सकती है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल
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