ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति ग्रह के शत्रु राशि में होने या शत्रु ग्रहों से युति करने अथवा मंगल या शनि ग्रह से दृष्ट होने पर गला, कान, सांस व यकृत संबंधी रोग, कफ, अतिसार, बवासीर, कंठमाला, अनिद्रा, पैरालाइसिस, आमवात, गठिया आदि रोग हो सकते हैं।
बृहस्पति ग्रह के अशुभ प्रभाव से बचाव के लिए भगवान विष्णु की पूजा करना, तुलसी जी पर दीपक प्रज्ज्वलित करना, गाय को बृहस्पतिवार के दिन गुड़ व चने की भीगी दाल खिलाना और 'ऊं बृं बृहस्पतये नम:' या 'ऊं ऐं क्लीं बृहस्पतये नम:'मंत्र का जप प्रतिदिन करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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