ज्योतिष में केतु ग्रह को भी छाया ग्रह माना गया है। केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव के कारण मनुष्य में खून की कमी, कैंसर, निमोनिया, बवासीर, पित्त, मूत्र व त्वचा रोग, अस्थमा, छूत के रोग, हैजा, जलने या चोट लगने का भय जोडों में दर्द आदि समस्याएं देखने को मिलती हैं।
केतु ग्रह के अशुभ प्रभाव से बचाव के लिए मनुष्य को 'ऊं कें केतवे नम:' और 'ऊं ह्रीं ऐं केतवे नम:' मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है। केतु ग्रह को प्रसन्न करने लिए श्रीगणेश स्तवराज का पाठ करना भी शुभ प्रभावकारी हो सकता है। - प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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