ज्योतिष में शनि ग्रह को दण्डनायक माना गया है। शनि ही एकमात्र ऐसा ग्रह है जो संसार के सभी प्राणियों को भेदभाव किए बिना उनके कर्मों के अनुसार दण्ड देता है। यह धारणा कि शनि हमेशा बुरा ही करते हैं, गलत है। सच्चाई यह है कि पूर्व जन्म में अच्छे कर्म करने वाले मनुष्यों की जन्मकुंडली में अपनी स्वयं की राशि या उच्च राशि में बैठ कर शनि उन्हें सभी तरह के लाभ देते हैं। मकर व कुंभ राशि, शनि ग्रह की अपनी राशि हैं। शनि, तुला राशि में उच्च के और मेष राशि में नीच के माने जाते हैं।
यदि किसी भी कारण से मनुष्य के जीवन में शनि के अशुभ प्रभाव की वजह से कष्ट, रोग, धन की कमी, गलत मार्ग पर जाना, आकस्मिक दुर्घटना आदि समस्याएं आ रही हैं तो समाधान के लिए प्रतिदिन हनुमान जी की उपासना, सूर्य देव की उपासना, शनि चालीसा व शनि अष्टक का पाठ करना चाहिए। संभव हो तो योग्य ज्योतिषविद् से सलाह लेकर काले घोड़े के नाल या नाव की पुरानी कील की अंगूठी अथवा नीलम या जमुनिया रत्न धारण करना चाहिए।
शनि ग्रह से पीड़ित मनुष्यों को शराब, नशीली वस्तुओं, मांसाहारी भोजन से परहेज करना आवश्यक है। इसके अलावा जिन मनुष्यों पर शनि की साढ़े साती चल रही है,उन्हें भी इनसे बचना चाहिए, अपने घरेलू व कार्यस्थल पर काम करने वाले नौकरों या मजदूरों के साथ कभी भी बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए और न ही उनकी बेईमानी से उनका वेतन, मजदूरी, जमीन-जायदाद आदि हड़पनी चाहिए।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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