जीवन में अक्सर आने वाले कष्ट, दुःख, रोग, बाधाएँ, भय, पराजय, हानि, धन की कमी, दुर्घटनाएं जैसी समस्याएं नव ग्रहों के अशुभ होने का परिणाम होती हैं। कौन सा ग्रह अशुभ फल दे रहा है, ये जानने के लिए कुंडली का अध्ययन किया जाता है। कुंडली या सही जन्म की तारीख और समय न होने की दशा में जीवन में आए दिन नजर आने वाले पूर्व संकेतों से भी अशुभकारी ग्रह को जाना जा सकता है। परंतु इन अशुभकारी ग्रहों का पता तभी चल सकता है जबकि जीवन में घटने वाली घटनाओं का सटीक विश्लेषण करने की पारखी नजर हमारे पास हो।
अनुभव के आधार पर यह पता चलता है कि जब घर या व्यावसायिक स्थल के बल्व या ट्यूबलाइट अचानक ही खराब होकर बंद हो जाएं, सोने या तांबे के बर्तन या आभूषण गुम हो जाएं, अचानक तेज बुखार, सर दर्द, तनाव, घबराहट या पित्त रोग होने लगे, पिता को कष्ट हो, किसी मुक़दमे में जीत की संभावना होने के बाद भी हार का सामना करना पड़ जाए अथवा सरकार के किसी विभाग की वजह से अचानक परेशानी का सामना करना पड़े तो कहा जा सकता है कि सूर्य बाधाकारी ग्रह है। इसी प्रकार अगर घर के नल या पाइप लाइन में लीकेज की वजह से पानी बहने लगे, पानी से भरा बर्तन या मिटटी का कोई बर्तन अचानक टूट जाए, माता या कन्या संतान को कष्ट होने लगे, मानसिक तनाव, घबराहट, बेचैनी, जुकाम, नजला, डायबिटीज और सहन शक्ति में कमी होने लगे तो ये माना जा सकता है कि चंद्र बाधाकारी ग्रह सिद्ध हो रहा है। मंगल के बाधाकारी ग्रह होने की दशा में अचानक ही मकान या जमीन को नुक्सान होता है, मकान में लगी ईंट टूट जाती है, दीपक, हवन की ज्योति या अग्नि अचानक की अपने आप बुझ जाती है और बैठे बिठाये किसी तरह की दुर्घटना या अग्नि अथवा बिजली के कारण चोट लग जाने जैसे समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।
सोचने समझने एवं सूंघने की शक्ति कम हो जाना, पढाई लिखाई में व्यवधान आना, काम भावना में कमी होना और त्वचा रोग उत्पन्न होने के संकेतों से पता चलता है कि बुध बाधाकारी ग्रह हो गया है। गुरु ग्रह के बाधाकारी हो जाने से धर्म एवं आध्यात्म में रूचि काम होने लगती है, झूठ बोलने की आदत पड़ने लगती है, सोने अथवा पीतल के बने बर्तन या आभूषण गुम हो जाते हैं और सर के बाल उड़ने लगते हैं। वहीँ शुक्र ग्रह के बाध्यकारी होने की वजह से हाथ एवं पैर के अंगूठे में सुन्नाहट देखने को मिलती है, त्वचा और गुप्त रोग परेशान करने लगते हैं, मन में विपरीत लिंग के प्रति काम भावना प्रबल हो जाती है और धातु क्षीण होने से कमजोरी आने लगती है।
आलस्य एवं नींद की अधिकता होने, अस्त्र-शस्त्र या लोहे की वास्तु अथवा वाहन से चोट लगने, सावधानी के बाद भी तेल के फैलने, घर के किसी पालतू जानवर जैसे काली गाय, भैंस, कुत्ता आदि की अचानक मृत्यु हो जाने, अकारण ही किसी श्रमिक या नौकर अथवा गरीब व्यक्ति से वाद-विवाद होने जैसी समस्याएं शनि के बाधाकारी ग्रह होने का पूर्व संकेत हैं। राहु के बाधाकारी ग्रह होने के कारण घर के पालतू जानवर अचानक या तो घर छोड़कर चले जाते हैं या फिर उनकी मृत्यु हो जाती है, किसी पवित्र नदी के पास जाकर भी स्नान का मन नहीं करता, सपने में मरा हुआ सर्प, छिपकली या धुंआ वाली अनजान जगह दिखाई देने लगती है, यात्रा के दौरान कोई वस्तु या धन गुम हो जाता है और हाथ एवं पैर के नाखून विकृत होकर टूटने लगते हैं। वहीं केतु के बाधाकारी ग्रह हो जाने से हमारी बातचीत की भाषा में कड़वाहट आने लगती है, सावधानी बरतने के बाद भी कार्यों में गलतियां होने लगती हैं, अचानक पागल कुत्ते के काटने की संभावना बन जाती है, घर के पालतू पक्षी की बीमारी की वजह से मृत्यु हो जाती है और अचानक ही किसी अच्छी या बुरी खबर का सामना करना पड़ सकता है।
नव ग्रहों के बाधाकारी होने के ये पूर्व संकेत पूर्ण नहीं हैं। इनके अलावा अन्य संकेत भी हो सकते हैं जिन्हें अनुभव के द्वारा महसूस किया जा सकता है। किसी गृह के बाधाकारी होने पर उसकी शांति और प्रसन्नता के लिए किसी कुशल ज्योतिष की सलाह से उपाय किये जाने चाहिए।--- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा
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