हार्बिन मेडिकल यूनिवर्सिटी और क्रैनफील्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े शोधकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय तक प्रदूषित वायु में सांस लेने वाले लोगों में टेंशन और डिप्रेशन की समस्या बढ़ रही है। इसकी वजह है प्रदूषित वायु में सल्फर डाईऑक्साइड गैस की मात्रा में वृद्धि होना। डाईऑक्साइड गैस के कारण मनुष्य की त्वचा, आंख, नाक, गले और फैफड़ों की म्यूकस मेम्ब्रेन को नुकसान होने लगता है। इसकी उच्च सांद्रता श्वसन प्रणाली में सूजन और जलन पैदा करती है। इसके परिणामस्वरूप गहरी सांस लेते समय दर्द, खांसी गले में जलन और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण होने लगते हैं।
समस्या से बचने के लिए प्रदूषित वायु में ज्यादा देर तक नहीं रहना चाहिए। सर्दी के दिनों में कोहरा व धुंध होने के कारण सुबह और शाम के समय टहलने या घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो अच्छी कंपनी का मास्क पहन कर ही निकलना चाहिए। इसके अलावा पौष्टिक आहार, ताजा फल व सब्जियों और पर्याप्त मात्रा में पानी व अन्य तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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