किसी जातक का केवल चेहरा या मुखमंडल देख कर भी उसके चरित्र से जुड़े विषयों और व्यावहारिक विषयों के बारे में जाना जा सकता है। जिस शास्त्र में चेहरा देख कर जातक के बारे में बताया जाता है, उसे ललाट लक्षण शास्त्र कहा जाता है। इसके अंतर्गत माथा, दोनों नेत्र, नाक, कान और ओष्ठ का अध्ययन किया जाता है।
जिस प्रकार जातक के हाथ में रेखाओं के साथ-साथ पर्वत के क्षेत्र होते हैं, ठीक उसी प्रकार जातक के मुखमंडल के माथे पर भी सात पर्वतों, शनि, गुरु, मंगल, सूर्य, चंद्र, शुक्र और बुध पर्वत की रेखाएं होती हैं। इन रेखाओं के अध्ययन से जातक के व्यक्तित्व के बारे में बताया जा सकता है।
इसके अलावा ललाट लक्षण शास्त्र के अनुसार माथे की लंबाई व चौड़ाई, नेत्र और भौहों की रचना, नासिका की लंबाई, कानों की लंबाई, ओष्ठ के आकार और मुखमंडल पर तिल चिह्न के आधार पर जातक के बारे में सटीक जानकारी की जा सकती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल
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