आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। उत्तर प्रदेश में आगरा पहला ऐसा शहर बन जाएगा, जो रैबीज मुक्त होगा। नगर निगम द्वारा वर्ष 2027 तक ऐसा कर लेने का दावा किया गया है।
नगर निगम के पशु कल्याण अधिकारी डॉक्टर अजय कुमार सिंह ने बताया कि आगरा को रैबीज मुक्त बनाने की पहल 26 जनवरी 2024 से शुरू हुई,जिसमें 90 हजार कुत्तों में से 49 हजार का वैक्सीनेशन हो चुका है। मौजूदा समय में भी हर महीने चार से पांच हजार कुत्तों को वैक्सीन लगाई जा रही है। हर कुत्ते पर 325 रुपये का खर्चा आ रहा है।
डॉक्टर सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2030 तक शहरों को रैबीज मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। आगरा नगर निगम ने तीन साल के अंदर शहर को रैबीज मुक्त करने की मुहिम शुरू की है। निगम के लोहा मंडी, शाहगंज, हरी पर्वत और ताजगंज जोन में रोजाना 250 से 300 लावारिस कुत्तों का वैक्सीनेशन किया जा रहा है। इसके लिए निगम ने एजेंसी की सेवाएं ली हैं। निगम द्वारा एजेंसी को वैक्सीन उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पशु कल्याण अधिकारी ने बताया कि रैबीज का कोई इलाज नहीं है। वैक्सीन लगवाना जरूरी होता है। कई बार लोग अज्ञानता के कारण घाव पर लाल मिर्च आदि लगा लेते हैं। इससे रैबीज का वायरस और तेजी से नसों में संचारित होने लगता है। कुत्ते, बंदर आदि के काट लेने पर सबसे पहले घाव को नल के पानी की तेज धार में सोडा वाले साबुन से बीस मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद जल्द से जल्द एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाना चाहिए।
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉक्टर राजेंद्र कुमार अरोड़ा ने बताया कि जिला अस्पताल की ओपीडी में कुत्ता व बंदर आदि काटने के रोजाना करीब साढ़े तीन सौ मरीज आते हैं। इनमें से कुछ ऐसे मरीज भी होते हैं जिन्हें घोड़ा, गधा, बिल्ली, चूहा आदि ने काटा होता है। बाकी मरीज कुत्तों के काटने के रहते हैं। ऐसे सभी मरीजों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई जाती है। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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