मंगलवार, 22 अक्टूबर 2024

मित्र और शत्रु

 श्रीमद्भगवद्गीता में श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि मनुष्य को स्वयं ही अपना उद्धार करना चाहिए, अपना पतन नहीं करना चाहिए, क्योंकि मनुष्य स्वयं ही अपना मित्र है और स्वयं ही अपना शत्रु है। 

   कौन अपना मित्र है और कौन अपना शत्रु, इसके लिए श्री कृष्ण कहते हैं कि जिस मनुष्य ने अपने आप पर विजय प्राप्त कर ली है, वह स्वयं ही अपना मित्र है, जबकि जिस मनुष्य ने अपने आप पर विजय प्राप्त नहीं की है, वह स्वयं ही अपना शत्रु है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

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