# मंदिर उत्तर-पूर्व में ही हो. जगह के अभाव में पूर्व या उत्तर में भी रख सकते हैं परंतु पूजा करते समय चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा में ही हो.
# सोने के कमरे व किचन में, शौचालय के पास, सीढ़ियों के नीचे, दक्षिण में एवं दक्षिण-पश्चिम कोण में मंदिर न हो.
# पूजा करते समय सीधे जमीन पर न बैठ कर स्वच्छ आसन लगाकर ही बैठना चाहिए तथा नियमित रूप से शुद्ध घी का दीपक व धूप आदि जलानी चाहिए.
# मंदिर में भगवान की मूर्ति एवं चित्र के अलावा साधु, संत, गुरु या पूर्वजों की मूर्ति व चित्र न रखे.
# अगर मंदिर कमरे के खुले स्थान में है तो वहां जूते-चप्पल पहन कर न घूमें तथा पूजा के बाद मंदिर का द्वार या पर्दा लगाकर बंद कर दें.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, सलाहकार एवं वास्तु ज्योतिष-लेखक, आगरा.
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