@ घर के अंदर या छत पर कबूतर का घोंसला अथवा मधुमक्खी या बर्र का छत्ता होना, दीवार और छत पर मकड़ी के जाले लगे रहना, दीवारों में दरार या टूट-फूट होना, घर में टूटे दर्पण, टूटे बर्तन एवं बिजली के खराब उपकरण रखे रहना, नलों से हर समय पानी का टपकना वास्तु दोष की वजह बन सकते हैं।
@ इसके अलावा उत्तर-पूर्व में कूड़ा या जूते-चप्पल एकत्र करना, छत पर कबाड़ जमा करना, घर में बंद घड़ी रखना, किचन एवं पूजा घर में जूते व चप्पल पहन कर आना वास्तु दोष माने गये हैं जो नकारात्मक ऊर्जा और प्रभाव देते हैं. इसलिए बेहतरी के लिए इन वास्तु दोषों से बचना चाहिए.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, सलाहकार एवं वास्तु लेखक, आगरा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें