श्रीद्भगवदगीता के चौदहवें अध्याय में श्री कृष्ण जी ने कहा है कि मनुष्य में प्रकृति से तीन गुण उत्पन्न होते हैं। इन्हें सत्व गुण, रजो गुण और तमो गुण कहा गया है। इनमें सत्व गुण का स्वरूप सबसे निर्मल है।
वहीं रजो गुण मनुष्य में तृष्णा और आसक्ति उत्पन्न करता है, जबकि अज्ञानता से उत्पन्न होने वाला तमो गुण मनुष्य को प्रमादयुक्त, मोह रखने वाला, आलसी और अति निद्रा वाला बना देता है।
सत्व गुण से ज्ञान उत्पन्न होता है, रजो गुण से लोभ उत्पन्न होता है तथा तमो गुण से प्रमाद, मोह एवं अज्ञान उत्पन्न होता है।
मनुष्य के जीवन में इन तीनों में से जिस गुण की प्रकृति सर्वाधिक होती है, उसका स्वभाव, कर्म और अंत: करण उसी गुण के अनुसार होने लगते हैं। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें