अगर सच्ची श्रृद्धा, विश्वास, पवित्रता और विधि विधान से भगवान गणेश, भगवान शंकर, भगवान विष्णु, देवी महाकाली, देवी महालक्ष्मी, देवी सरस्वती और सूर्य देव की निरंतर आराधना एवं साधना की जाए तो साधक दिव्य दृष्टि प्राप्त कर सकता है।
दिव्य दृष्टि प्राप्त साधक किसी व्यक्ति के बारे में कुंडली या हस्तरेखा देखे बिना भी सही-सही फलकथन कर सकता है। इस बात का प्रमाण हैं दिव्य दृष्टि प्राप्त ज्योतिषाचार्य नारद, वसिष्ठ, वेदव्यास, अगस्त्य मुनि और गर्ग, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे जातक के बारे में बिना कुछ देखे सटीक फलकथन कर दिया करते थे।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा
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