श्रीमद्भगवद्गीता में योग करने वाले योगियों के लिए भी उपदेश दिया गया है। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि योग करने वाले साधक को अपने मन और इंद्रियों को वश में करके समस्त इच्छाओं को त्याग कर किसी एकांत स्थल पर कुश, मृगछाला या मुलायम वस्त्र के आसन पर बैठकर और एकाग्र चित्त होकर परम पिता परमात्मा का ध्यान लगाना चाहिए।
ध्यान लगाने के लिए अपने शरीर और गर्दन को बिल्कुल सीधा रखते हुए नाक के अग्र भाग पर अपनी दृष्टि लगाने के बाद आंखों को धीरे से बंद कर लेना चाहिए। इसके बाद अपनी अंतरआत्मा से ध्यानमग्न होकर परमात्मा का चिंतन करना चाहिए। योग साधना करने वाले मनुष्य को अधिक मात्रा में भोजन करने या बिल्कुल भी भोजन न करने, अधिक सोने और अधिक जागने से परहेज करना चाहिए अन्यथा योग सिद्ध नहीं होता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा
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