बुधवार, 7 अप्रैल 2021

भारतीय दर्शन में पंचमहाभूत

 भारतीय दर्शन में पांच प्राकृतिक तत्वों का उल्लेख मिलता है। ये पांच तत्व हैं आकाश, पृथ्वी, वायु, जल और अग्नि। इन्ही पांच तत्वों को पंचमहाभूत कहा गया है। देखा जाए तो इन सभी तत्वों का अपना अलग अलग अस्तित्व होता है, परंतु जब ये तत्व एकत्र होते हैं तो सामूहिक ऊर्जा का संचय होने लगता है जो सभी के लिए लाभप्रद होता है। 

   वास्तु की दृष्टि से पंचमहाभूत सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए अनिवार्य माने गए हैं। जिस वास्तु में इन पांच तत्वों का संतुलन होता है, वहां नकारात्मक ऊर्जा नही रहती। जिससे उस वास्तु में निवास या व्यवसाय करने वालों के सामने किसी तरह की कोई समस्या नहीं आती। वहीं इन तत्वों के असंतुलन से वास्तु दोष उत्पन्न हो जाते हैं। 

   दर्शन शास्त्र की मान्यता है कि मनुष्य का शरीर भी इन्ही पंच तत्वों से बना होता है। ये पांच तत्व मनुष्य को सुनने, स्पर्श करने, देखने, सूंघने और स्वाद लेने की अनुभूति कराते हैं। इन पांच तत्वों में से किसी भी तत्व के असंतुलन से शरीर के रोगग्रस्त होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए यह आवश्यक है कि पंचमहाभूत के महत्व को समझते हुए इनके संतुलन के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा

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