शुक्रवार, 2 अप्रैल 2021

सुखी जीवन के लिए शुभ कर्म

 मनुष्य के जीवन में कर्म की प्रधानता को महत्व दिया गया है, परंतु परम सत्य यह भी है कि प्रत्येक मनुष्य का अपना भाग्य भी जीवन को सर्वाधिक प्रभावित करता है। यदि मनुष्य के कर्म अच्छे हों, रहने, व्यवसाय एवं व्यापार करने वाली जगह वास्तु के अनुरूप बनी हुई हो तथा अपने इष्ट देव पर अटूट विश्वास हो तो कुंडली में बैठे ग्रह और भाग्य की प्रतिकूलता का बहुत ज्यादा अशुभ असर मनुष्य पर नहीं पड़ता है और जीवन यात्रा आसानी से चलती रहती है।

  कुंडली में बैठे ग्रहों की स्थिति के सटीक विश्लेषण से इतना तो अनुमान लगाया ही जा सकता है कि मनुष्य को जीवन में किस प्रकार की सुख-सुविधाएं हासिल होंगी और कौन सी शारीरिक,मानसिक व आर्थिक परेशानियों का सामना उसे करना होगा।  

  वहीं घर, व्यवसाय या व्यापार स्थल के वास्तु निरीक्षण से वहां के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव के कारणों की जानकारी आसानी से जानी जा सकती है। तब उसी के अनुसार धैर्य, विश्वास व बताए गए उपायों के साथ शुभ कर्म करते रहने से विभिन्न समस्याओं व बाधाओं पर विजय प्राप्त करके सुखी, संपन्न और स्वस्थ जीवन का भरपूर आनंद उठाया जा सकता है। --प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।

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