दाल, सब्जी, कढ़ी आदि में तेज पत्तों का किचन में उपयोग होता है। दालचीनी, लौंग और इलायची की सुगंध वाले तेज पत्ते को तमाल पत्र भी कहते हैं। अपच, पेट के रोग, दस्त लगने, वात रोग, वमन होने, कब्ज, सर्दी, खांसी, जुकाम, श्वांस रोग, कफ, ह्रदय रोग आदि में तेज पत्तों का प्रयोग किया जाता है।
बुखार आने पर तेज पत्तों का काढ़ा लाभकारी माना गया है। कफ रोगों में तेज पत्ते के वृक्ष की छाल और पीपल का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर शहद के साथ चाटना चाहिए। तेज पत्तों को जलाकर उसकी बारीक राख से रोजाना दांत साफ करने तथा मसूड़ों की मालिश करने से दांत व मसूड़ों के रोग दूर होने लगते हैं। तेज पत्तों को जलाकर घर में इसका धुआं करने से घर कीटाणुमुक्त हो जाता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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