शुक्रवार, 19 मार्च 2021

ग्रहों के अशुभ होने से आती हैं समस्याएं

सौरमंडल में मौजूद नवग्रहों की गति एवं कुंडली में स्थिति का असर पृथ्वी पर रहने वाले समस्त जीवों पर पड़ता है। यहां तक कि वनस्पति भी इन्हीं ग्रहों से ऊर्जा ग्रहण करके अपना पोषण करती हैं। यूं तो ग्रहों की अशुभता के बहुत से कारण ज्योतिष शास्त्र में मिलते हैं, परंतु कुछ ऐसे सामान्य कारण भी हैं जो ग्रहों की अशुभता का कारण बनते हैं और जातक के जीवन में धन हानि,कलह, शत्रुओं से पीड़ा, शारीरिक एवं मानसिक रोग, संतान से परेशानी, व्यापार में घाटा, नौकरी में बाधा, मानसिक तनाव, विवाह में बाधा जैसी समस्याएं आने लगती हैं।

* किसी भी जीव या प्राणी की आत्मा को कष्ट या ठेस पहुंचाने, सरकारी टैक्स की चोरी करने, दादा, पिता या श्वसुर आदि का अपमान करने से सूर्य ग्रह कुपित होकर अशुभ फल देते हैं। नानी, दादी, माता या परिवार की किसी बुजुर्ग और सम्मानित महिला को कष्ट देने तथा किसी की वस्तु को द्वेषपूर्वक लेने से चंद्र ग्रह का अशुभ असर जीवन पर पड़ता है। भाई के साथ झगड़ा या धोखा करने तथा पत्नी के भाइयों का अपमान करने से मंगल ग्रह का प्रकोप जातक को झेलना पड़ सकता है।

* बहन, बेटी, बुआ, मौसी, पत्नी की बहन, पत्नी की भाभी और किन्नरों को कष्ट देने से बुध ग्रह पीड़ित होकर अशुभ फल देते हैं। पिता, दादा, नाना, गुरु और साधू-सन्यासियों का उपहास उड़ाने तथा उनको अपमानित करके कष्ट देने से गुरु ग्रह कुपित होकर अशुभ फल देने लगते हैं। जीवन साथी को कष्ट देने, गंदे, फटे और पुराने वस्त्र धारण करने अथवा घर में सजोकर रखने और पर स्त्री के साथ संबंध बनाने से शुक्र ग्रह पीड़ित होकर जातक को कष्ट देते हैं।

* चाचा, ताऊ से झगड़ा करने, किराए पर लिए गए मकान या दूकान को खाली न करने अथवा खाली करने के बदले में धन मांगने, शराब, मांस या नशीले पदार्थों का सेवन करने से शनि ग्रह कुपित होते हैं जिसकी वजह से जातक जीवन में कष्ट भोगता है।

* बड़े भाई का अपमान करके उन्हें कष्ट पहुंचाने और सर्प पालकर अपनी आजीविका कमाने वाले सपेरों को कष्ट पहुंचाने पर राहु ग्रह नकारात्मक प्रभाव देने लगते हैं। इसी प्रकार भांजे एवं भतीजे को कष्ट देने, कुत्ते को मारने, मंदिर या किसी धर्म स्थल को नष्ट करने अथवा मंदिर में लगे ध्वज को क्षति पहुंचाने, किसी मुक़दमे में झूठी गवाही देने और किसी के साथ धोखा करने से केतु ग्रह कुपित होकर जातक को कष्ट देते हैं।

* नवग्रहों को अपने अनुकूल और शुभ बनाने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि सदैव शुभ कार्य ही किये जाएं और सभी को समुचित आदर-सत्कार दिया जाए। साथ ही ईश्वर की भक्ति करते हुए कुपित ग्रहों की शांति एवं प्रसन्नता के लिए ज्योतिष के अनुसार उपाय करते रहना भी जरूरी है। --- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा 

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