सीधी और सच्ची बात इतनी सी है कि हमारे जीवन के अतीत में जो कुछ भी हुआ है या वर्तमान में हो रहा है या फिर भविष्य में होगा, वो हमारा प्रारब्ध ही है। सुख-दुख, अमीरी-गरीबी, अच्छा-बुरा, पसंद-नापसंद, मान-अपमान, मिलना-बिछुड़ना, हंसना-रोना, बीमारी-दुर्घटना, संयोग-वियोग, जन्म-मृत्यु......सब कुछ हमारे वश के बाहर है। हम सिर्फ प्रयास कर सकते हैं, सोच-विचार कर सकते हैं, दूसरों से चर्चा कर सकते हैं, अपने आप में चिंतन कर सकते हैं।
जीवन की सत्यता तो यही है कि हम अपने वर्तमान पर ध्यान दें, बीते समय को याद करके बेवजह अपनी ऊर्जा को नष्ट न करें और न ही आने वाले कल के बारे में सोच कर अपने वर्तमान को बर्बाद करें। जो आज है उसी का आनंद लें। आज जो हमारे पास है उसी का उपयोग करें। आज जो हमारे साथ है, उसी के साथ मिलकर अपने सपनों को साकार करें। यहां कुछ भी स्थायी नहीं है। आज जो हमसे जुड़ा है, कल वो हमसे दूर भी हो सकता है। अपने दिलो दिमाग से इस भ्रम को बिल्कुल बाहर निकाल दें कि हम ही कर्ता-धर्ता हैं, हमारे चाहने से ही सब कुछ होता रहा है, हम जो चाहे, हासिल कर सकते हैं।
कर्म करते रहना हमारी फितरत होनी चाहिए। फल की आशा में बैठे रहना कदापि उचित नहीं है। दूसरों को पसंद करें, लेकिन इस बात की कोई उम्मीद न रखें कि दूसरे भी हमें पसंद करें। अगर प्रारब्ध में होगा तो हमारे मनमाफिक फल अवश्य मिलेगा, दूसरे भी हमें अवश्य ही पसंद करेंगे, जीवन में वो सब कुछ हासिल होगा जो हम चाहते आए हैं। बस धैर्य, विश्वास, कर्म, आशा और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने का जज्बा अपने अंदर बनाए रखने की आवश्यकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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