बहुत से व्यापारी पर्याप्त पूंजी की व्यवस्था करके उद्योग अथवा कारखाना लगा लेते हैं और जी तोड़ मेहनत करते हैं, परंतु कई बार अथक प्रयासों के बावजूद अपेक्षित लाभ मिलने के बजाय व्यापार में नुकसान होता रहता है या फिर समस्याएं आती रहती हैं।
अन्य कारणों के साथ-साथ उद्योग या कारखाने के निर्माण, मशीनरी, तैयार माल आदि की व्यवस्था में वास्तु नियमों की अनदेखी भी होने वाले नुक्सान या घाटे का एक कारण हो सकती है। कारखाना और उद्योग की प्रगति के लिए उपयोगी प्रमुख वास्तु नियम इस प्रकार हैं:
@ कारखाना या उद्योग जिस भूखंड पर लगाया जाए, उसके चारों ओर बनी बाऊंड्रीवाल पश्चिम एवं दक्षिण की तुलना में पूर्व और उत्तर दिशा की तरफ नीची होनी आवश्यक है। वहीं भूखंड का ईशान कोण न तो कटा हुआ हो और न ही वहां किसी तरह का भारी सामान रखा गया हो। ईशान कोण में पानी की व्यवस्था करना उपयुक्त रहता है, परंतु ओवरहैड पानी की टंकी सदैव नैऋत्य कोण में ही रखना आवश्यक है।
@ कारखाने का मुख्य प्रवेश द्वार पूर्व, उत्तर या ईशान कोण में ही रखना लाभकारी होता है। पूर्वी आग्नेय अथवा उत्तरी वायव्य कोण में कभी भी मुख्य प्रवेश द्वार नहीं रखना चाहिए।
@ कारखाने की बाउंड्रीवाल से एक फुट से दूर हटकर आग्नेय या वायव्य कोण के भाग में शौचालय बनवाये जा सकते हैं। वहीं वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था फैक्ट्री की उत्तरी वायव्य या पूर्वी आग्नेय कोण की दिशा में की जा सकती है।
@ कारखाने के दक्षिण भाग में भारी सामान एवं मशीनें, उत्तरी भाग में हलकी मशीनें, उत्तर में कच्चा एवं आधा बना माल और वायव्य कोण में पूरी तरह बना हुआ माल रखा जाना चाहिए।
@ कारखाने में प्रशासनिक विभाग के लिए पूर्व या उत्तर दिशा को श्रेष्ठ माना गया है। अधिकारी एवं कर्मचारियों को भी उत्तर या पूर्व में ही चेहरा करके बैठना चाहिए। कारखाना स्वामी की कुर्सी आने वाले ग्राहकों की कुर्सी की तुलना में अधिक ऊंची होनी चाहिए।
@ कारखाने में लगने वाले बॉयलर, ट्रांसफार्मर, चिमनी, जेनरेटर, बिजली या टेलीफोन का खंबा, बिजली का मीटर, गैस या बिजली से चलने वाली भट्टी आदि की व्यवस्था सदैव पूर्वी आग्नेय कोण में ही करनी चाहिए।
@ कारखाने या उद्योग स्थल में दक्षिण और पश्चिम भाग में बड़े वृक्ष तथा पूर्व या उत्तर में घास का लॉन एवं छोटे आकार के पेड़ लगाए जाने चाहिए।
@ कारखाने के ईशान कोण और मध्य भाग यानी ब्रम्ह स्थल को साफ़ सुथरा, खुला और हल्का रखा जाना आवश्यक है। इन दोनों ही स्थानों में कोई मशीन, कबाड़ा, फर्नीचर या दूसरा कोई भी सामान नहीं रखा जाना चाहिए।
@ कारखाने के जिस भाग या कमरे में कारीगर काम करते हों, वहां इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनके सिर के ऊपर वाली छत पर कोई बीम न हो। अगर ऐसा है तो आभासी छत बनाकर बीम को ढकवा देना चाहिए अथवा उनके काम करने की जगह को बदल देना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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