शनिवार, 13 मार्च 2021

पाप कर्मों के भोग काल में करें ये कार्य

 गीता में कहा गया है कि मनुष्य को उसके द्वारा किए गए कर्मों का फल तो भोगना ही पड़ता है। अच्छे कर्मों का फल अच्छा होता है तो वहीं बुरे व पाप कर्मों का फल बुरा होता है। किए गए कर्मों का फल भोगने से कोई बच नहीं सकता। माना जाता है कि मनुष्य द्वारा जो पाप कर्म जानबूझकर उद्देश्य के साथ किए जाते हैं, वे किसी भी तरीके से समाप्त नहीं किए जा सकते। ऐसे कर्मों का फल तो देर-सबेर भोगना ही पड़ता है। 

   जबकि असावधानीपूर्वक और बिना उद्देश्य के हुए पाप कर्म ईश्वर की आराधना एवं प्रायश्चित करने से समाप्त हो जाते हैं। पाप कर्मों का फल भोग काल जब आता है तो मनुष्य को दुख, संताप, रोग, धन की कमी, परिवार के सदस्यों से मनमुटाव, परिवार के सदस्य से बिछोह, अपमान, क्लेश आदि स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास के साथ अपने ईष्ट देवी देवता की पूजा, मंत्र जाप, दान, हवन, जड़ीबूटी स्नान, रत्न या जड़ी धारण करने से मानसिक शांति मिल जाती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल आगरा। 

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