गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण के चित्र या मूर्ति के समक्ष बैठकर शुद्ध घी का दीपक प्रज्ज्वलित कर श्रीमद्भभागवत के छठवें स्कंध के आठवें अध्याय में दिए गए 'श्री नारायणवर्म' का पाठ पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ प्रतिदिन करना चाहिए। साथ ही गर्भवती के कमरे में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का चित्र भी लगा देना चाहिए।
समय की कमी या किसी अन्य कारण से अगर यह पाठ करना संभव न हो तो सात्विक मनोवृत्ति के साथ भगवान श्रीकृष्ण के नाम व मंत्र का जप करते रहना चाहिए। गर्भवती महिलाओं के कष्टों का शमन करने के लिए 'श्री वासुदेव-सूत्र' सबसे आसान और प्रभावी वैष्णव कवच है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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