सोमवार, 15 मार्च 2021

कर्मों का फल भोग है निश्चित

 वैदिक दर्शन में मनुष्य के पुनर्जन्म की अवधारणा को स्वीकार किया गया है।मान्यता है कि मनुष्य निरंतर शुभ-अशुभ कर्मों में रत रहता है उसी के अनुसार फल भी भोगता है। इसके लिए मनुष्य को अनेक जन्म धारण करने पड़ते हैं। वैदिक दर्शन के अनुसार कर्म तीन प्रकार के होते हैं, संचित कर्म, प्रारब्ध कर्म और क्रियमाण कर्म। इन कर्मों की व्याख्या विस्तार से की गई है। जिनके बारे में हम अपनी आगे की पोस्ट में विवेचना करेंगे। 

   यहां हम सिर्फ यही कहना चाहेंगे कि भगवान ने मनुष्य का जीवन यूं ही गंवा देने के लिए नहीं दिया है, बल्कि मनुष्य को जन्म मिला है सदैव शुभ कर्म करने के लिए, सद्मार्ग पर चलने के लिए, समस्त मानवता की नि:स्वार्थ भाव से सेवा करने के लिए और ईश्वर भक्ति के द्वारा अपने पाप कर्मों से मुक्ति पाने के लिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 



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