रात्रि या दिन में सोने के बाद बहुत से लोग सपने देखते हैं। सपने देखते समय हमारा अंतर्मन स्थूल शरीर के बंधन से तो मुक्त हो जाता है, लेकिन हमारे विचार, सोच, स्वभाव, कार्य आदि उस पर बंधन नहीं लगा पाते हैं। सपने अच्छे व बुरे, दोनों तरह के हो सकते हैं। सपनों के द्वारा दुख, हर्ष, शोक, भय, उद्वेग आदि आंतरिक भाव व्यक्त होते हैं। यह जरूरी नहीं है कि देखे गए सभी सपने फलीभूत हों। कुछ ही सपने आने वाले समय में सच हो पाते हैं।
यहां हम मनुष्य की प्रकृति के साथ सपनों के संबंध की चर्चा कर रहे हैं। आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य की प्रकृति तीन प्रकार की होती है, वात, पित्त और कफ। या तो मनुष्य इनमें से किसी भी एक प्रकृति का हो सकता है या फिर दो या दो से अधिक मिश्रित प्रकृति का हो सकता है। सपने में जो लोग अपने को आकाश में उड़ता हुआ या भोजन करते हुए देखते हैं, वे वायु प्रकृति वाले होते हैं। ऐसे लोगों में पेट से संबंधित बीमारी होती रहती है।
इसी तरह जो लोग सपने में अपने को किसी नदी, नहर, तालाब, झरने या बाथरूम में नहाते देखते हैं, बरसात होते या पानी पीते हुए देखते हैं, उनकी कफ प्रकृति होती है। ऐसे लोगों में खांसी, जुकाम, नजला, कफ बनना, दमा, गले की खराश, डायबिटीज जैसी बीमारी होने की संभावना रहती है। सपने में किसी भी रूप में अग्नि देखने वालों की पित्त प्रकृति होती है। ऐसे लोग पित्त से संबंधित रोग, पेट में जलन, मुंह में खट्टा पानी आना, वमन, जी मिचलाना जैसी बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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