मंगलवार, 23 मार्च 2021

बीमारी से बचने के लिए मंत्र जाप करना है श्रेष्ठ उपाय

 ज्योतिष शास्त्र की मान्यता के अनुसार हमारे सौर मंडल में मौजूद सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, ब्रहस्पति, शुक्र, शनि, राहू और केतु ग्रहों की अनिष्ट स्थान-स्थिति और उनकी दृष्टि के प्रभाव से मनुष्यों को दुख, कष्ट, रोग, कलह, धन हानि, आकस्मिक दुर्घटना, मृत्यु भय जैसी पीड़ाओं से गुजरना पड़ता है। वर्तमान समय में भी भारत सहित संसार के अधिकांश देशों के नागरिक अनिष्ट-ग्रह प्रभाव से कोरोना जैसी आकस्मिक महामारी के कारण बीमारी का शिकार हो रहे हैं और काल के गाल में समा रहे हैं। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से लॉकडाउन जैसे कठोर कदम उठाते हुए लोगों को अपने घरों से बाहर न निकलने के निर्देश भी दिए हैं। ऐसा करना आवश्यक भी है। 

   बीमारी से बचने के लिए घर में रहकर मंत्र जाप करना ही श्रेष्ठ है। ज्योतिष की दृष्टि से देखा जाए तो जिन मनुष्यों की कुंडली में रोगकारक ग्रहों की स्थिति अनिष्टकारी है, उनके लिए तो ऐसे समय में घर से बाहर निकलना घातक ही माना जा सकता है। क्योंकि ग्रहों की अनिष्टकारी स्थिति मनुष्य को शीघ्र ही रोगग्रस्त बना सकती है। ऐसी स्थिति में कोई भी औषधि लाभ नहीं पहुंचाती तथा मनुष्य का बल, वीर्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता अनिष्टकारी ग्रह द्वारा हरण कर लिया जाता है। इसीलिये इन दिनों शरीर को मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाए रखने के लिए अनिष्टकारी ग्रहों के बीज मंत्र का जाप करना एक आसान और प्रभावी उपाय हो सकता है। इन मंत्रों के जाप के लिए विशेष कुछ भी नहीं करना पड़ता है। बस जब भी समय मिले अपने ईष्ट देवी-देवता के सामने या फिर एकांत जगह में आसन बिछाकर बैठ जाइए और दांए हाथ में माला लेकर शुद्ध उच्चारण करते हुए बीज मंत्र का जाप करते जाइए। ध्यान सिर्फ इतना ही रखना है कि मंत्र जाप से पहले शरीर की शुद्धि कर ली गई हो और मंत्र जाप करते समय मन में किसी प्रकार के अपवित्र विचार और किसी के प्रति दुर्भावना न हो। नवग्रहों के बीज मंत्र इस प्रकार हैं:

सूर्य ग्रह के लिए "ऊं ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:", चंद्र ग्रह के लिए " ऊं श्रां श्रीं श्री स: चंद्राय नम:", मंगल ग्रह के लिए "ऊं क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:", बुध ग्रह के लिए " ऊं ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:", ब्रहस्पति ग्रह के लिए "ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम:", शुक्र ग्रह के लिए " ऊं द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:", शनि ग्रह के लिए "ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:", राहु ग्रह के लिए " ऊं भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम:" और केतु ग्रह के लिए "ऊं स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नम:" मंत्र का जाप किया जा सकता है। ज्योतिषविदों की राय है कि कोरोना वायरस के लिए विशेष रूप से राहु ग्रह जिम्मेदार है, इसलिए इन दिनों राहु ग्रह की शांति के लिए राहु ग्रह के बीज मंत्र का जाप करना लाभकारी सिद्ध हो सकता है। 

  माना जाता है कि जो भी मनुष्य पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ ध्यान लगा कर बीज मंत्र का जाप करता है, उसके जीवन में बहुत से सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। जन्म कुंडली में जो ग्रह अनिष्ट फल दे रहे होते हैं, वे भी मंत्र जाप करने से शुभ फल देने लग जाते हैं। बीज मंत्र के जाप से मानसिक शांति, अर्थ लाभ, रोगों से मुक्ति, संतान सुख, कार्य सिद्धि, परिवार में सुख-समृद्धि, व्यापार में उन्नति, लिए गए लोन से मुक्ति आदि लाभ मिलते हैं। अगर बीज मंत्र का जाप संबंधित ग्रह से जुड़े दिन या वार को करते हुए व्रत उपवास नियम का पालन भी किया जाए तो सकारात्मक परिणाम अति शीघ्र मिलने लगते हैं। बीज मंत्र का जाप कब व कितने दिनों तक और कितनी माला किया जाए, व्रत में क्या खाया-पिया जाए, इसकी जानकारी किसी भी ज्योतिषविद् या व्रत कथा की पुस्तक से हासिल की जा सकती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट इलाहाबाद के महत्वपूर्ण आदेश

 Please click, subscribe and share our YouTube Channel 'Newsline Nation' : Pramod Kumar Agrawal