नारद पुराण में योग के आठ अंगों, यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि का उल्लेख किया गया है। इनमें से यम और नियम का पालन करते हुए अपनी बुद्धि को स्थिर करके अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाया जा सकता है।
अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह (द्रव्यों का संचय न करना), अक्रोध (शांत रहना) और अनसूया (ईर्ष्या न करना) कर्म यम के अन्तर्गत आते हैं, जबकि तप, स्वाध्याय, संतोष, शौच, भगवान विष्णु जी की आराधना और संध्योपासन कर्म नियम कहलाते हैं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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