प्रमोद कुमार अग्रवाल
शिशु के जन्म के बाद पहले घंटे में उसे मां का पहला पीला गाढ़ा दूध अवश्य पिलाना चाहिए। इससे शिशु और मां दोनों ही गंभीर बीमारियों से बचे रह सकते हैं।
यह कहना है आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की अध्यक्ष डॉक्टर शिखा सिंह का। उन्होंने बताया कि शिशु के जन्म के बाद पहले घंटे में स्तनपान मां को खून की कमी और स्तन कैंसर के खतरे को कम करता है। स्तनपान से प्रसव के बाद गर्भाशय को सिकोड़ने में भी मदद मिलती है। जिन बच्चों को मां का दूध नहीं मिलता है, उनमें संक्रमण, एलर्जी बार बार बुखार, जुकाम, खांसी, डायरिया अस्थमा होने की संभावना बनी रहती है।
कमला नगर आगरा निवासी महिला रोग विशेषज्ञ एवं एसएन मेडिकल कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉक्टर सरोज सिंह ने बताया कि शिशु को मां के पीले गाढ़े दूध से वंचित करने से नवजात बार बार बीमार पड़ रहे हैं। छाती और आंतों में संक्रमण होने के साथ ही उनका पाचन तंत्र भी खराब होने लगता है। मां के दूध से वंचित नवजात में त्वचा की एलर्जी और अस्थमा की समस्या भी देखने को मिली है।
डॉक्टर सरोज सिंह ने बताया कि मां के दूध में मौजूद कोलस्ट्रम में मां की भरपूर एंटीबॉडी होती हैं, जो शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से विकसित करने में मददगार होती हैं। शिशु के जन्म के बाद छह माह तक केवल मां का दूध ही आवश्यक है। पानी या अन्य कोई तरल पदार्थ पिलाने की भी जरूरत नहीं है। छह महीने के बाद दाल, चावल, केले, खिचड़ी आदि को पेस्ट बना कर खिलाना चाहिए।
बाल रोग विशेषज्ञ एवं पूर्व चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर युवराज सिंह ने बताया कि स्वस्थ मां और शिशु के लिए सभी आवश्यक टीके समय पर लगवाने चाहिए। गर्भवती महिलाओं को दाल, हरी सब्जियां, फल समेत अन्य पोषक आहार देना चाहिए। शिशुओं का टीकाकरण निर्धारित समय तालिका के अनुसार डॉक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए कराया जाना जरूरी है। शिशु के बीमार होने पर नीम हकीम के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए बल्कि बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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