प्रमोद कुमार अग्रवाल
माहवारी बंद होने से महिलाओं की सेहत पर खराब असर पड़ रहा है। मेडिकल की भाषा में इसे मीनोपॉज कहा जाता है। इसके कारण महिलाओं में हार्मोन की कमी होने से चिड़चिड़ापन, भूलने और पसीना आने की समस्याएं हो रही हैं। लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने से मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होने लगता है। आगरा मीनोपॉज सोसाइटी की चेयरमैन डॉक्टर संजना महेश ने बताया कि 35 से 50 साल की उम्र में महिलाओं में माहवारी बंद होने से ये दिक्कतें पनपने लगती हैं। माहवारी बंद होने से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बंद होने लगते हैं। इससे महिलाओं के व्यवहार में तेजी से परिवर्तन होने लगता है। इसमें चिड़चिड़ापन, जल्दी गुस्सा आना, घबराहट, बेचैनी, अधिक पसीना आना, घबराहट में नींद टूट जाने जैसी परेशानी होने लगती हैं।
डॉक्टर सविता त्यागी ने बताया कि बहुत सी महिलाएं मीनोपॉज के बारे में अपरिचित होने के कारण ऐसे लक्षणों को माहवारी संबंधी परेशानी मानकर नजर अंदाज करती हैं और इलाज नहीं करातीं। इससे बीमारी बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में लापरवाही किए बगैर स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करके इलाज कराना चाहिए।
डॉक्टर आरती गुप्ता ने बताया कि मीनोपॉज का पता चलने पर महिलाओं को प्रतिदिन तेज गति से दस हजार कदम चलने के साथ ही योग व ध्यान करना चाहिए। भोजन में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा ज्यादा कर देनी चाहिए। सोयाबीन, छोले, राजमा, दाल, फल और सलाद अधिक लेने चाहिए। अगर माहवारी में कोई दिक्कत नजर आए तो उसे नजर अंदाज न करके महिला चिकित्सक को दिखा लेना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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