@ ज्योतिष शास्त्र में लग्न को शरीर तथा चंद्र ग्रह को मन के रूप में स्वीकार किया गया है। इसलिए विवाह से पहले जन्म राशि के अनुसार वर और कन्या के गुणों का मिलान किया जाता है। गुण मिलान के द्वारा वर और कन्या के स्वास्थ्य, शिक्षा, आर्थिक स्थिति, प्रजनन शक्ति, आपसी सामंजस्य, प्रेम आदि को जानने की कोशिश की जाती है।
@ ज्योतिष में गुण मिलान पद्धति के अंतर्गत क्रमबद्ध रूप से एक से लेकर आठ तक आठ बातें होती हैं- 1. वर्ण, 2. वश्य, 3. तारा, 4. योनि, 5. ग्रह मैत्री, 6. गण, 7. भकूूट और 8. नाड़ी। इनकी संख्याओं का कुल योग 36 होता है।
@ वर और कन्या के जन्म की तारीख, जन्म का समय और जन्म स्थान के आधार पर विवाह मेलापक विधि से गुणों का मिलान किया जाता है। इसके अनुसार कम से कम 18 गुण मिलने पर विवाह किया जा सकता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नाड़ी और भकूूट के गुण अवश्य मिलने चाहिए।
@ वर और कन्या के विवाह के लिए गुणों का मिलान करते समय दोनों की मांगलिक स्थित, कुंडली में दोष या विपरीत योग आदि को भी देखना चाहिए। जिससे कि विवाह के बाद दोनों प्रेमपूर्वक सुखी और संपन्न जीवन व्यतीत कर सकें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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