श्रीमद्भगवद्गीता के चौदहवें अध्याय के श्लोक संख्या चौदह और पंद्रह के अनुसार मनुष्य की मृत्यु के बाद उसकी गति उसके तीन गुणों के अनुसार ही निर्धारित होती है, जो इस प्रकार है :
@ सत्वगुण वाला मनुष्य मृत्यु के बाद पुण्यात्माओं को प्राप्त होने वाले उत्तम यानि निर्मल लोक में जाता है।
@ रजोगुण वाला मनुष्य मृत्यु के बाद दोबारा मनुष्य योनि में जन्म लेता है।
@ तमोगुण वाला मनुष्य मृत्यु के बाद पशु, पक्षी, कीट, पतंगे आदि की मूढ़ योनियों में जन्म लेता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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