आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराना मरीजों को गंभीर बीमारियों का शिकार बना रहा है। बिना सोचे समझे झोलाछाप मरीजों को हैवी एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड देते हैं, जिससे लिवर और किडनी के खराब होने का खतरा रहता है।
यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉक्टर अरुण श्रीवास्तव का। झोलाछाप डॉक्टर बुखार, खांसी, जुकाम, पेट दर्द, उल्टी, दस्त जैसी सामान्य बीमारियों में हैवी एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड, नारकोटिक्स श्रेणी की दवाएं देने लगते हैं। बच्चों को भी यही दवाएं दी जाती हैं। इन दवाओं के मनमाने उपयोग से मरीजों की किडनी और लिवर पर सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द की संभावना भी बढ़ जाती है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि झोलाछाप से इलाज कराने से जान जाने का खतरा भी बना रहता है। ज्यादा डोज में एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड के सेवन से शरीर में इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है, जिससे भविष्य में इन दवाओं का मरीजों पर असर भी नहीं होगा। उन्होंने मरीजों से कहा है कि कोई भी बीमारी होने पर झोलाछाप डॉक्टर से इलाज नहीं कराएं बल्कि योग्य, प्रशिक्षित और विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श करें और उनके द्वारा बताई गई दवाओं का ही सेवन करें। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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