मंगलवार, 30 जनवरी 2024

दक्षिण-पश्चिम दिशा में हो मेन गेट तो करें उपाय

घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में मेन गेट का होना वास्तु दोष की वजह बन सकता है। इसके कारण घर में अनावश्यक खर्चे लगे रहते हैं। इसके अलावा घर के स्वामी का मन घर में नहीं लगता। वह घर से बाहर रहने की कोशिश में रहता है। 

    इस वास्तु दोष के निवारण के लिए मेन गेट पर दहलीज बनाकर उसके नीचे चांदी का तार या चांदी की पत्ती तथा नौ छोटे तांबे के पिरामिड लगा देने चाहिए। 

    दहलीज पर पीले रंग का पेंट कराने के साथ ही मेन गेट पर स्वास्तिक लगा सकते हैं।

    इसके अलावा मेन गेट के ऊपर बाहर की तरफ पाकुआ दर्पण लगाने से भी इस वास्तु दोष के नकारात्मक प्रभाव कम होने लगते हैं। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

शुक्रवार, 26 जनवरी 2024

उत्तर पूर्व में बनी सीढ़ियां देती हैं समस्याएं

 वास्तु शास्त्र में दिए गए नियमों के विपरीत किया गया निर्माण वहां रहने वालों के लिए बहुत सी समस्याओं का कारण बन सकता है। अगर सीढ़ियों का निर्माण उत्तर पूर्व में हो रहा है तो यह भी वास्तु दोष है। घर की उत्तर पूर्व दिशा में बनी सीढियों की वजह से घर में आर्थिक एवं मानसिक समस्याएं बनी रहती हैं। 

   अगर जगह की कमी के कारण सीढ़ियों को सही दिशा में बनाना संभव नहीं है तो उत्तर पूर्व की दीवार और सीढ़ियों के बीच कम से कम तीन इंच का गैप दे देना चाहिए। कहने का अर्थ यह है कि उत्तर पूर्व की दीवार से सीढ़ियों को मिलाना नहीं चाहिए। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

गुरुवार, 25 जनवरी 2024

सीढ़ियों के नीचे रखा सामान दे सकता है रुकावट

   अक्सर लोग अपने घरों में सीढ़ियों के नीचे जूते, चप्पल, बेकार का सामान, इनवर्टर आदि रख देते हैं या फिर टॉयलेट या स्टोर रूम बना देते हैं। ऐसा करना वास्तु दोष है। 

      व्यावहारिक अनुभव से यह सिद्ध हुआ है कि सीढ़ियों के नीचे बिजली और अग्नि से संबंधित कोई भी उपकरण जैसे वाटर कूलर, एसी पैनल, मीटर, इनवर्टर, समर की मोटर, गैस सिलेंडर आदि नहीं रखना चाहिए। 

      इसके अलावा सीढ़ियों के नीचे जगह का उपयोग करने के लिए, किचन, टॉयलेट और स्टोर रूम का निर्माण भी नहीं कराना चाहिए। सीढ़ियों के नीचे की जगह को किसी भी सामान से नहीं भरना चाहिए। अन्यथा घर में धनागमन और बनते हुए कार्यों में व्यवधान आने की संभावना बनी रहती है। 

      इस वास्तु दोष को दूर करने के लिए सीढ़ियों के नीचे रखे सामान व उपकरणों को तत्काल हटा देना चाहिए। अगर जगह की कमी के कारण सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट या स्टोर बनवाना जरूरी है तो टॉयलेट या स्टोर की छत को सीढ़ियों से कम से कम छह इंच का गैप देकर नीचे रखना चाहिए।-- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

बुधवार, 24 जनवरी 2024

वास्तु दोष दे सकता है दांपत्य जीवन में कलह

 अगर परिवार में पति व पत्नी के दांपत्य जीवन में आए दिन कलह की स्थिति है और बात तलाक लेने तक पहुंच चुकी है तो एक बार अपने घर की ओर अवश्य नजर डाल लीजिए। हो सकता है घर में वास्तु दोष हो। 

     यदि घर के उत्तर पूर्व विदिशा यानि कि ईशान कोण में शौचालय बना हुआ है, या फिर ईशान कोण कटा हुआ है तो दांपत्य जीवन कलह पूर्ण होने लगता है और मामला तलाक लेने तक भी पहुंच सकता है। 

    इसके अलावा ईशान कोण में ऊंचाई पर कोई चबूतरा, किचन या किसी तरह का कोई निर्माण है अथवा यहां कूड़ेदान, भारी सामान या किसी तरह का कबाड़ा रखा हुआ है या फिर यह विदिशा बंद है तो भी दांपत्य जीवन तनावपूर्ण बना रहता है। 

    इस वास्तु दोष से बचने के लिए ईशान कोण में बने शौचालय को तत्काल उपयोग में लाना बंद कर देना या हटवा देना चाहिए। अगर ऊंचाई पर चबूतरा बना हो तो उसे भी हटाना जरुरी है। हटाना संभव नहीं है तो दक्षिण दिशा की ओर चबूतरे से ऊंचा फर्श या निर्माण करा देना चाहिए। इस वास्तु दोष को दूर करने के लिए ईशान कोण को साफ व खुला रखना ही सबसे आसान तरीका है। --आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु सलाहकार एवं लेखक, आगरा। 

शुक्रवार, 19 जनवरी 2024

क्लास रूम में किधर हो ब्लैकबोर्ड

 किसी भी स्कूल, कॉलेज या कोचिंग सेंटर के विद्यार्थियों की सफलता के लिए अच्छी शिक्षा के साथ-साथ वहां क्लास रूम की स्थिति, ब्लैकबोर्ड और विद्यार्थियों के बैठने की सही दिशा का भी योगदान होता है। वास्तु नियमों के अनुरूप क्लास रूम होने से वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों में विलक्षण प्रतिभा और बेहतर ज्ञान देखने को मिलता है। ऐसे विद्यार्थी गैर शैक्षणिक गतिविधियों में भी आगे रहते हैं। 

   वास्तु नियमों के अनुसार विद्यार्थियों के लिए क्लास रूम केवल आयताकार या वर्गाकार होने चाहिए। क्लास रूम में ब्लैकबोर्ड को उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर रखना चाहिए। पढ़ाई करते समय विद्यार्थियों का चेहरा भी उत्तर या पूर्व की तरफ रहना चाहिए। इसके अलावा क्लास रूम में प्रकाश व्यवस्था भी अच्छी हो। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

गुरुवार, 18 जनवरी 2024

वास्तु दोष भी हो सकता है विवाह में देरी का कारण

  वास्तु शास्त्र का सम्बन्ध हमारे सम्पूर्ण जीवन से है। भवन और जमीन की स्थिति, शयन करने के तरीके, बेड की स्थिति आदि का प्रभाव किसी न किसी रूप में हमारे ऊपर अवश्य ही पड़ता है। वास्तु दोष होने पर कैरियर, धन, संतान, दाम्पत्य जीवन, संतान की पढ़ाई और उनके विवाह आदि में समस्याएँ आने लगती हैं। 

   सब कुछ ठीक होने के बावजूद अगर विवाह योग्य लड़के अथवा लड़की के विवाह में अनावश्यक देरी हो रही हो तो इसका कारण जन्म कुंडली में ग्रह दोष या वास्तु दोष हो सकता है। वास्तु दोष की वजह से विवाह में देरी के निम्न कारण हो सकते हैं : 

   वास्तु के अनुसार गलत दिशा में लगाया गया बेड विवाह में बाधक होता है। लड़के को सदैव पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात ईशान कोण में तथा लड़की को उत्तर-पश्चिम दिशा अर्थात वायव्य कोण में ही अपना बेड लगाना चाहिए।  

   बेड दीवार से अलग हटकर लगाना चाहिए। दीवार से सटाकर लगाया हुआ बेड दोषपूर्ण माना जाता है। बेड पर बैठकर भोजन करने से बचना चाहिए। सोते समय करवट बायीं  तरफ ही रहे। दाहिनी ओर करवट लेकर सोने से मानसिक अस्थिरता एवं नकारात्मकता बनी रहती है।

    बेड के नीचे किसी तरह का कोई सामान, कागज, कबाड़ा आदि नहीं रखना चाहिए। अगर बेड बॉक्स वाला है तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसमें केवल ओढ़ने-बिछाने के कपडे, चादर, रजाई, गद्दे, तकिया आदि ही रखें जाएँ। अन्य सामान भरने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। जिससे विवाह में बाधा आती है। 

     जगह की कमी की वजह से यदि बॉक्स वाले बेड में अन्य सामान रखना मजबूरी हो तो इस नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए बेड के नीचे एक बाउल में समुद्री या सेंधा नमक रखें या फिर बेड के चारों पायों के नीचे तांबे की एक-एक स्प्रिंग लगा दें। --  आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

मंगलवार, 16 जनवरी 2024

नैऋत्य कोण के बढ़ने से आती हैं स्वास्थ्य समस्याएं

   घर के दक्षिण पश्चिम कोण यानि नैऋत्य कोण का बढ़ना भी वास्तु दोष उत्पन्न करता है। इसके कारण आर्थिक विकास में बाधा आती है एवं स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

   नैऋत्य कोण के इस वास्तु दोष को दूर करने के लिए दक्षिण पश्चिम दिशा में बढ़े हुए भाग को दक्षिण पूर्व विदिशा की सीध तक कवर्ड करा देना चाहिए। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।

ईशान कोण का कटा होना है वास्तु दोष

   घर के उत्तर पूर्व कोण यानि ईशान कोण का कटा होना वास्तु दोष है। इसकी वजह से घर में रहने वाले लोगों के विकास में व्यवधान आते रहते हैं तथा सबसे बड़े पुत्र संतान को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

    इस दोष के निवारण के लिए ईशान कोण के कटे हुए भाग में परगोला बनवा कर भवन को आयताकार कर देना चाहिए। इसके साथ ही इस कोण में किसी भी तरह के निर्माण करने से भी बचना चाहिए। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

ब्रह्म स्थान में न हो कोई निर्माण

 किसी भी घर के ब्रह्म स्थान में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए क्योंकि यह एक ऐसा वास्तु दोष है जिसके कारण वहां रहने वालों को खर्चों में बढ़ोत्तरी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।

    बचाव के लिए ब्रह्म स्थान को खुला एवं स्वच्छ रखने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा ब्रह्म स्थान में तुलसी का पौधा लगाकर प्रतिदिन उस पर जल चढ़ा कर दीपक प्रज्ज्वलित करना चाहिए। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

    

रविवार, 14 जनवरी 2024

अविवाहित कन्या का बेडरूम हो सही दिशा में

   यदि किसी अविवाहित कन्या के विवाह में अनावश्यक देरी हो रही है और लगातार प्रयास करने के बाद भी मनपसंद रिश्ता नहीं मिल रहा है तो हो सकता है कि उस कन्या का बेडरूम गलत दिशा में हो। 

    वास्तु शास्त्र के अनुसार अविवाहित कन्या का बेडरूम सदैव उत्तर पश्चिम दिशा में ही रखना चाहिए। ऐसा करने से कन्या का विवाह सही समय पर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

आग्नेय कोण में न हो पानी का स्रोत

 आग्नेय कोण यानि दक्षिण-पूर्व विदिशा में पानी का स्रोत नहीं होना चाहिए। यह एक ऐसा वास्तु दोष है जिसके कारण दांपत्य जीवन में तनाव बना रहता है। 

   इस दोष से बचने के लिए आग्नेय कोण से पानी की पाइप लाइन उत्तर पूर्व विदिशा (ईशान कोण) अथवा उत्तर दिशा की तरफ ले जाकर वहां से घर के अंदर पानी की सप्लाई देनी चाहिए। 

   आग्नेय कोण में विद्युत एवं अग्नि से संबंधित उपकरण जैसे इंवर्टर, विद्युत मीटर, इलेक्ट्रिक फर्नेस, जनरेटर, बिजली या कोयले से संचालित होने वाली मशीने आदि स्थापित करनी चाहिए। -- आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

गुरुवार, 11 जनवरी 2024

पश्चिम व दक्षिण दिशा में लगाएं बड़े वृक्ष

मकान खरीदने के बाद अक्सर लोग मकान में पेड़-पौधे लगवाते हैं और जगह के अनुसार बगीचा बनवाते हैं। वास्तु शास्त्र में दिशाओं के अनुरूप वृक्ष लगाने के नियमों का उल्लेख किया गया है। इन नियमो के विपरीत जाकर वृक्ष लगाना कई समस्याओं की वजह बन सकता है।

   वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी मकान की पूर्व एवं उत्तर दिशाओं में भूलकर भी बड़े व विशालकाय वृक्ष नहीं लगाने चाहिए। इन दोनों दिशाओं का अधिक से अधिक खुला रहना जरूरी है। बड़े एवं विशालकाय वृक्ष लगाने के लिए पश्चिम और दक्षिण दिशाओं को सबसे अच्छा माना गया है। 

     वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि मकान की पश्चिम और दक्षिण दिशाओं को भारी रखना चाहिए। इन दिशाओं में ऊंचाई वाली दीवार या बड़े आकार वाले वृक्ष लगाने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से मकान में रहने वाले लोगों को आर्थिक, पारिवारिक एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से कम जूझना पड़ता है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आचार्य प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा

बीम के नीचे सोना सेहत के लिए खतरा

 घर या किसी कार्यस्थल की छत पर बीम डली हुई है तो कोशिश यह करनी चाहिए कि बीम के नीचे न तो बैठने का स्थान हो और न ही सोने के लिए बेड। अन्यथा सेहत से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह एक प्रकार का वास्तु दोष है। 

   व्यावहारिक रूप से यह देखने में आया है कि बीम के नीचे बैठकर काम करने या फिर शयन करने वाले व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक समस्याएं होने लगती हैं। ऐसे व्यक्ति प्राय: सिर दर्द, तनाव, अनिद्रा, जोड़ों में दर्द, मानसिक अस्थिरता का शिकार हो सकते हैं। 

  अगर जगह की कमी के कारण बीम के नीचे बैठकर काम करना या शयन करना मजबूरी है तो ़इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए छत पर बीम को ढ़कने वाली फॉल्स रूफ लगवा देनी चाहिए। ऐसा करने से बीम से होने वाले दोषों का असर कम हो जाता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु आचार्य, आगरा

ड्रॉइंग रूम के नैऋत्य कोण में न लगाएं शीशा

 घर के अंदर ड्रॉइंग रूम के नैऋत्य कोण (दक्षिण पश्चिम विदिशा) में शीशे का लगा होना वास्तु दोष का कारण बन सकता है। इसके दुष्प्रभाव से उस घर में रहने वालों के मन में भ्रांतियां, पैरों में दर्द, आपसी प्रेम व हर्षोल्लास में कमी देखने को मिलती हैं। 

    अगर ड्रॉइंग रूम के नैऋत्य कोण में शीशा लगा हुआ है तो उसे हटा देना चाहिए। किसी कारण से वहां से शीशा हटाना संभव नहीं है तो इस वास्तु दोष के प्रभाव को कम या शून्य करने के लिए शीशे पर गहरे रंग की अपारदर्शी फिल्म, पर्दा या प्लाई लगा देना चाहिए।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य, आगरा

ईशान कोण में नहीं रखें कबाड़

घर का ईशान कोण यानि कि उत्तर पूर्व विदिशा को वास्तु शास्त्र में सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र माना गया है। इस दिशा में कोई भी स्टोर या कबाड़ नहीं रखना चाहिए। ईशान कोण को सदैव खुला एवं स्वच्छ रखने की सलाह दी जाती है। 
    ईशान कोण में किसी भी प्रकार का भारी निर्माण, स्टोर या टॉयलेट नहीं रखना चाहिए। क्योंकि यह दिशा धार्मिक कार्य एवं पूजा पाठ के लिए शुभ मानी गई है। ईशान कोण में स्टोर या कबाड़ होने से घर में आर्थिक तंगी, पुरुष सदस्यों को शारीरिक व मानसिक कष्ट और अनावश्यक तनाव जैसी स्थिति समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य, आगरा। 

बुधवार, 10 जनवरी 2024

दक्षिण-पश्चिम कोण में लगा दर्पण देता है समस्याएं

घर के दक्षिण-पश्चिम कोण में लगा दर्पण परिवार में अशांति, तनाव, मानसिक रोग और पैरों में कष्ट जैसी समस्याएं दे सकता है। बचाव के लिए दर्पण को वहां से दूसरी जगह लगा देना चाहिए और यदि ऐसा करना संभव न हो तो दर्पण को मोटे कागज़, पर्दा, प्लाई, वॉलपेपर या काले रंग की फिल्म लगाकर ढ़क देना चाहिए।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल

गलत न हो दुकान मालिक के बैठने की दिश

किसी दुकान या व्यावसायिक प्रतिष्ठान के मालिक (स्वामी) को कमरे की दीवारों के कोनों (कॉर्नर) की तरफ पीठ करके या कमरे के बीचोबीच या बीम के नीचे नहीं बैठना चाहिए, अन्यथा मालिक को शारीरिक व मानसिक रोग और आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल 

जनपद न्यायालय आगरा में 22 फरवरी को लगेगा वृहद विधिक साक्षरता सेवा शिविर

                        प्रमोद कुमार अग्रवाल   राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ क...