बुधवार, 21 सितंबर 2022

अंडरग्राउंड वाटर टैंक की सही दिशा

 अडरग्राउंड वाटर टैंक, हैंडपंप और समर के लिए पूर्व दिशा, उत्तरी ईशान कोण या पूर्वी ईशान कोण को सबसे उत्तम माना गया है। इससे उस वास्तु में सुख, संपत्ति, संतान, सम्मान और आरोग्य सुख की प्राप्ति होती है। 

  दक्षिण व पश्चिम दिशा, पश्चिमी या उत्तरी वायव्य कोण, पूर्वी या दक्षिण नैऋत्य कोण तथा वास्तु के बीचों बीच बोरिंग, हैंडपंप, कुआं, अंडरग्राउंड वाटर टैंक अथवा किसी भी प्रकार का कोई गड्ढा होना वास्तु दोष है। इसके कारण शारीरिक व मानसिक रोग, मुकदमेबाजी, चोरी, अकाल मृत्यु आदि समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार।

आग्नेय कोण में रखें गैस चूल्हा

किचन में दक्षिण-पश्चिम दिशा में खाना पकाने के लिए गैस का चूल्हा, स्टोव, अंगीठी, ओवन, इलेक्ट्रिक चूल्हा आदि का होना वास्तु दोष है। इसके कारण घर में रहने वाली महिलाओं का स्वास्थ्य खराब होने की संभावना बनी रहती है। यदि ऐसा है तो किचन में चूल्हा आदि को दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) की तरफ शिफ्ट कर देना चाहिए।--प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक, आगरा।

प्रवेश द्वार पर मांगलिक चिह्न

 भवन के प्रवेश द्वार पर हल्दी और चावल के आटे की पीठी से हाथ को मांगलिक चिंह के रूप में छापा जाता है। हाथ कर्म का प्रतीक है जबकि हाथ की चारों अंगुलियां व अंगूठा पंच तत्वों (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी व आकाश) का द्योतक है। माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति, आरोग्य और आपसी सद्भाव बना रहता है।-प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

रविवार, 18 सितंबर 2022

ऐसे फोटो न लगाएं....

 घर के किसी भी कमरे में युद्ध के फोटो, इंद्रजाल के समान काल्पनिक फोटो, राक्षस, पहाड़ व जंगल के फोटो, नग्न या रोते हुए बच्चे, महिला व पुरुष के फोटो, हिंसक व जंगली जानवरों के फोटो अथवा गरीबी या भयानक स्थिति को दर्शाने वाले फोटो कभी भी नहीं लगाने चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं लेखक,आगरा। 

उत्तर पूर्व दिशा होती है महत्वपूर्ण

 घर की उत्तर-पूर्व दिशा को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिशा में भूमिगत जल स्रोत,बरामदा,पूजा घर,मंदिर,पोर्टिको,खुली जगह,बेसमेंट,बालकनी आदि बनवा सकते हैं। लेकिन इस दिशा में कोई भी भारी निर्माण,लैट्रिन,दीवार,सीढ़ी आदि के होने से धन,स्वास्थ्य व संतान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

स्वास्तिक का प्रयोग होता है शुभ

 प्राचीन काल से ही स्वास्तिक का प्रयोग मांगलिक चिह्न के रूप में किया जाता रहा है। यह गणेश जी के लिप्यात्मक स्वरूप के अलावा चारों दिशाओं का प्रतीक भी है। मकान के मुख्य द्वार के दोनों ओर शुद्ध घी व सिंदूर मिलाकर स्वास्तिक चिह्न बनाने से वहां नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है और परिवार में सुख-समृद्धि व शांति बनी रहती है।- वास्तु आचार्य एवं लेखक प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा। 

व्यापार में आर्थिक लाभ के लिए करें ऐसा

 किसी भी दुकान, ऑफिस अथवा व्यापारिक स्थल में बैठते समय अपना मुख उत्तर पूर्व दिशा की तरफ रखना चाहिए। इसके साथ-साथ आलमारी, फर्नीचर, रिकॉर्ड, भारी सामान आदि हमेशा पश्चिम व दक्षिण दिशा में ही रखना चाहिए। ऐसा करने से आर्थिक लाभ की स्थिति बनती है और आश्चर्यजनक प्रगति देखने को मिलती है।- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

उत्तर पूर्व में फर्श रहे नीचा

 घर की उत्तर-पूर्व दिशा में बने फर्श का दक्षिण-पश्चिम में बने फर्श से कुछ ऊंचा होना वास्तु दोष है। इस दोष से बचने के लिए दक्षिण-पश्चिम के फर्श को ऊंचा कराएं अथवा पश्चिम दिशा के कोने में एक चबूतरा बनवाएं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

दरवाजे पर मांगलिक चिह्न

 भवन के प्रवेश द्वार पर हल्दी और चावल के आटे की पीठी से हाथ को मांगलिक चिह्न के रूप में छापा जाता है। हाथ कर्म का प्रतीक है जबकि हाथ की चारों अंगुलियां व अंगूठा पंच तत्वों (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी व आकाश) का द्योतक है। माना जाता है कि इससे घर में सुख, शांति, आरोग्य और आपसी सद्भाव बना रहता है।-प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

शनिवार, 17 सितंबर 2022

किराये के मकान में वास्तु

 किराये के मकान में वास्तु के अनुसार बदलाव करना संभव नहीं होता। इसलिए जहां तक संभव हो मंदिर ईशान कोण में, गैस चूल्हा आग्नेय कोण में, भारी सामान दक्षिण पश्चिम में और पलंग का सिरहाना दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। एक कमरे के मकान में भी यही व्यवस्था करने से बहुत सी समस्याओं का समाधान होता है।- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्याोतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

उत्तर पूर्व में रहे मुख

 किसी भी दुकान, ऑफिस अथवा व्यापारिक स्थल में बैठते समय अपना मुख उत्तर पूर्व दिशा की तरफ रखना चाहिए। इसके साथ-साथ आलमारी, फर्नीचर, रिकॉर्ड, भारी सामान आदि हमेशा पश्चिम व दक्षिण दिशा में ही रखना चाहिए। ऐसा करने से आर्थिक लाभ की स्थिति बनती है और आश्चर्यजनक प्रगति देखने को मिलती है।- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

दक्षिण पश्चिम में हो ऊंचा फर्श

 घर की उत्तर-पूर्व दिशा में बने फर्श का दक्षिण-पश्चिम में बने फर्श से कुछ ऊंचा होना वास्तु दोष है। इस दोष से बचने के लिए दक्षिण-पश्चिम के फर्श को ऊंचा कराएं अथवा पश्चिम दिशा के कोने में एक चबूतरा बनवाएं।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

जल का दान करना है शुभ

 वास्तु शास्त्र के अनुसार पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश को पंचतत्व माना गया है। इनमें से जल जीवन का अमृत है। जल का दान करना शुभ होता है। इसलिए जितना संभव हो, जल का दान करते रहें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

बाथरूम व लैट्रीन के लिए दिशा

 वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के अंदर पूर्व या उत्तर दिशा में बाथरूम (केवल नहाने के लिए), लैट्रीन (शौचालय) पश्चिम या वायव्य कोण से हटकर उत्तर में या दक्षिण दिशा में बनवा सकते हैं। बाथरूम व लैट्रीन, दोनों एक साथ पश्चिमी वायव्य कोण व पूर्वी आग्नेय कोण में बनाए जा सकते हैं। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

अनाज रखने के लिए स्टोर की सही दिशा

 मकान में अगर अनाज या खाद्य पदार्थ रखने के लिए अलग से स्टोर बनाना हो तो, उत्तर-पश्चिम विदिशा (वायव्य कोण) शुभ होती है। इससे घर में अन्न आदि की कमी नहीं रहती। ऐसे स्टोर को कभी भी खाली नहीं छोड़ना चाहिए बल्कि स्टोर में थोड़ा बहुत अन्न या अन्य खाद्य पदार्थ अवश्य रखने चाहिए। ---- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा। 

गलत दिशा में किचन हो तो करें उपाय

अगर किचन आग्नेय कोण के अलावा किसी दूसरी जगह है तो किचन में गैस या स्टोव आदि को आग्नेय कोण में रखें और रात में किचन की सफाई के बाद उत्तर दिशा की दीवार के पास तांबे के लोटे में पानी भरकर रखें। दूसरे दिन यानि सुबह उस पानी को पौधों में डाल दें। --- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।

न हो गड्ढा या कुआं

 किसी भवन के नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम कोना), आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व कोना) और वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम कोना) की दिशा में गड्ढा या कुआं नहीं होना चाहिए। ऐसा होने से उस भवन में रहने वाले लोगों में आपसी कलह और अशांति बनी रहती है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, वास्तु आचार्य एवं ज्योतिष-वास्तु लेखक, आगरा। 

जनपद न्यायालय आगरा में 22 फरवरी को लगेगा वृहद विधिक साक्षरता सेवा शिविर

                        प्रमोद कुमार अग्रवाल   राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ क...