रविवार, 13 जून 2021

सेहत के लिए प्राणायाम

   समस्त प्राणियों के शरीर में फेफड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इनकी मदद से वे सांस लेने और छोड़ने का काम करते हैं। यह प्रक्रिया स्वत: ही होती रहती है। मेडिकल साइंस के अनुसार फेफड़ों में स्पंज के समान लगभग सात करोड़ तीस लाख कोष्ठ होते हैं।

   सांस लेने और छोड़ने की सामान्य गति के दौरान इनमें से केवल दो करोड़ कोष्ठ ही सक्रिय रहते हैं। शेष कोष्ठों का श्वसन क्रिया में कोई योगदान नहीं होता। कोष्ठों की इस निष्क्रियता के कारण खांसी, तपेदिक, अस्थमा, सांस लेने के दौरान परेशानी होने लगती है। 

   फेफड़ों के समस्त कोष्ठों की सक्रियता के लिए प्राणायाम की आवश्यकता होती है। नियमित रूप से प्राणायाम करने के दौरान फेफड़ों में वायु का प्रवाह और उत्सर्जन सुचारू रूप से होने लगता है, फेफड़ों की कार्य करने की क्षमता बढ़ जाती तथा शरीर में ऑक्सीजन के स्तर में वृद्धि होने से शरीर के अंदर से धीरे-धीरे बीमारियां बाहर होकर तन और मन सेहतमंद होने लगते हैं। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार प्राणायाम अवश्य करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा

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