रविवार, 4 अप्रैल 2021

कल्याणकारी हैं श्री राम भक्त हनुमान

 श्री राम भक्त हनुमान एक ऐसे साक्षात एवं जागृत देव हैं, जिनकी उपासना में पवित्रता और पूर्ण भक्ति भाव बनाए रखना आवश्यक माना गया है, क्योंकि ब्रह्मचर्य का पालन करने के कारण उनका संपूर्ण जीवन पवित्र रहा है। हनुमान जी की उपासना से सुख, शांति, आरोग्य एवं अन्य लाभों की प्राप्ति होती है तथा लिया गया कर्जा भी जल्दी ही चुक जाता है। 

    शनिदेव के प्रकोप से बचने के लिए हनुमान जी की उपासना को ही सर्वोत्तम माना गया है। जिस भवन में हनुमान जी का चित्र या प्रतिमा होती है, वहां भूत-प्रेत, पिशाच और बुरी आत्माएं कभी अनिष्ट नहीं कर सकती। मंगल, शनि एवं पितृ दोषों से मुक्ति के लिए हनुमान जी की उपासना करनी चाहिए।

   हनुमान जी के विविध मुद्राओं में चित्र देखने को मिलते हैं, जैसे पर्वत उठाए हुए, लंका दहन करते हुए, श्री राम और लक्ष्मण को अपने कंधे पर लेकर उड़ते हुए, श्री राम दरबार में भक्त के रूप में बैठे हुए, सूर्य को ग्रास बनाते हुए, सुरसा के मुख से बाहर आते हुए, गदा को कंधे पर रखे एक घुटने पर बैठे हुए, लेटे हुए और प्रभु श्री राम के गले लगते हुए आदि स्वरुप हनुमान जी के हैं। इन सभी स्वरूपों का अपना-अपना महत्व है। 

भवन की दक्षिण दिशा में लाल रंग के बैठी हुई मुद्रा में लगाया गया हनुमान जी का चित्र सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इससे दक्षिण दिशा से आने वाली नकारात्मक ऊर्जा और बुरी ताकतें दूर होने लगती हैं तथा घर में सुख, समृद्धि एवं शांति का प्रादुर्भाव होने लगता है। भूत-प्रेत और बुरी आत्माओं से बचाव के लिए भवन के मुख्य द्वार पर पंचमुखी हनुमान जी का चित्र लगाया जा सकता है।

   वास्तु शास्त्र की मान्यता है कि पंचमुखी हनुमान जी का चित्र या प्रतिमा भवन में वास्तु दोषों का निवारण तो करती ही है, वहां रहने वालों के जीवन में उन्नति के अवसर भी लाती है। यदि परिवार के सदस्यों में साहस और आत्मविश्वास की कमी हो तो अपने एक हाथ में पर्वत उठाये हुए हनुमान जी का चित्र घर में लगाना चाहिए। जीवन में उत्साह, साहस और सफलता पाने के लिए घर में उड़ते हुए हनुमान जी चित्र लगाया जा सकता है।

   भवन के ड्राइंग रूम में श्री राम दरबार में नमस्कार की मुद्रा में बैठे हुए हनुमान जी का चित्र परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम, विश्वास, स्नेह और एकता को बढ़ाने में सहायक होता है। परिवार के सदस्यों में धार्मिक भावना बनाये रखने के लिए श्री राम की आराधना करते हुए अथवा भजन करते हुए हनुमान जी का चित्र लगाना शुभ होता है। इस चित्र को घर में लगाने से परिवार के सदस्यों में आपसी विश्वास भी मजबूत होता है।

   चूंकि हनुमान जी बालब्रह्मचारी हैं, इसलिए भूलकर भी हनुमान जी के चित्र या प्रतिमा को शयन कक्ष में नहीं लगना चाहिए। सीढ़ियों के नीचे, रसोई घर अथवा किसी अपवित्र स्थान पर भी हनुमान जी का चित्र नहीं लगाना चाहिए अन्यथा अशुभ परिणाम मिलते हैं। घर में अदृश्य वास्तु दोषों के निवारण के लिए दक्षिण दिशा में त्रिकोणाकार मंगल यंत्र स्थापित करके नियम से प्रतिदिन ग्यारह माला " ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" मंत्र का जप करने से लाभ मिलता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा   

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