इस संसार में जिसका जन्म हुआ है, समय आने पर उसकी मृत्यु भी सुनिश्चित है। जन्म और मृत्यु के इस सत्य को स्वीकार करने से कोई भी इंकार नहीं कर सकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि जन्म लेने वाले की मृत्यु निश्चित है और मरे हुए का जन्म भी निश्चित है। मृत्यु के बाद पुनर्जन्म होता ही है।
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा यह भी कहा गया है कि शरीर का ही अंत होता है। शरीर में बसने वाली आत्मा का कभी अंत नहीं होता। आत्मा तो मृत शरीर को त्याग कर दूसरे नए शरीर में चली जाती है। आत्मा को कभी नहीं देखा जा सकता। सिर्फ शरीर को ही देख सकते हैं। जब आत्मा अजर-अमर है तो फिर शोक क्यों किया जाए? अत: इस नाशवान शरीर के लिए शोक और दुख प्रकट करना समझदारी नहीं है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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