मंगलवार, 13 मई 2025

आंखों की सेहत बिगाड़ रही है तेज धूप और गर्मी

             (प्रमोद कुमार अग्रवाल) 

 तेज धूप और गर्मी अब आंखों को भी बीमार बना रही है। आंखों में जलन, सूखापन, किरकिराहट और लालपन जैसे लक्षण नजर आएंगे तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से इलाज कराना चाहिए। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की अध्यक्ष डॉक्टर स्निग्धा जैन ने बताया कि तेज धूप और गर्मी में लगातार काम करने या फिर घूमने के कारण आंखों की बीमारियों में वृद्धि हो रही है। ऐसे में अपनी मर्जी से घरेलू उपचार का सहारा लेना अथवा किसी मेडिकल स्टोर से डॉक्टर के परामर्श के बगैर आई ड्रॉप आंखों में डालना नुकसान पहुंचा सकता है।   

     डॉक्टर जैन ने बताया कि गर्मी के मौसम में आंखों को बीमार होने से बचाने के लिए तेज धूप में सीधे बाहर निकलने के बजाय आंखों पर रंगीन चश्मा लगा कर ही निकलना चाहिए। मोटर साइकिल और स्कूटी चलाते समय हेलमेट पहनने से आंखों को गर्मी से बचाया जा सकता है। 

    नेत्र रोग विभागाध्यक्ष ने बताया कि आंखों में किसी तरह का कोई इन्फेक्शन होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके उनकी सलाह के अनुसार ही दवाओं का उपयोग करना चाहिए। आंखों में किरकिराहट और खुजली होने पर आंखों को रगड़ना नहीं चाहिए बल्कि साफ पानी के छींटे हल्के हाथ से मारने चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

गर्मी के मौसम में रखें सेहत का ध्यान

                (प्रमोद कुमार अग्रवाल) 

 सूरज की तपिश और गर्म हवाओं के चलते लोगों को पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, चक्कर आना जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसे मौसम में सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी प्रभारी डॉक्टर मनीष बंसल ने बताया कि गर्मी के इस मौसम में खानपान के मामले में लापरवाही बरतने पर डायरिया और फूड पॉयजनिंग के मरीजों की संख्या बढ़ी है। गर्मी के चलते ब्लडप्रेशर में उतार चढ़ाव होने से घबराहट और चक्कर आने की परेशानी मिल रही है। दस्त होने से शरीर में पानी की कमी के मरीज भी आ रहे हैं। 

   इमरजेंसी प्रभारी ने बताया कि जो लोग बाहर का दूषित खाना खा रहे हैं, उनमें उल्टी, दस्त और बुखार के लक्षण नजर आ रहे हैं। खासकर बच्चों में इसका ज्यादा असर मिल रहा है। ऐसे में लोगों को सेहत के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। गर्मी के असर से बचने के लिए धूप में निकलते समय सिर को सूती कपड़े से ढककर निकलें। टाइट कपड़े पहनने के बजाय ढीले कपड़े पहनें। 
   डॉक्टर बंसल ने बताया कि गर्मी के मौसम में चाय, कॉफी, एल्कोहल, कोल्ड ड्रिंक, तंबाकू के सेवन से परहेज करें। तला हुआ और बाजार का अपदूषित भोजन न करें। तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा, प्याज, टमाटर, सलाद, संतरा, नारियल पानी, अंगूर, पपीता, रसबरी आदि का भरपूर सेवन करें। दोपहर के समय घर से बाहर जाने से बचें। दिन भर में चार से पांच लीटर पानी पिएं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

हॉस्पिटल जा रहे हैं तो रखें सावधानी, वरना हो सकता है संक्रमण

                     (प्रमोद कुमार अग्रवाल) 

हॉस्पिटल जाते समय पर्याप्त सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। थोड़ी सी भी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। इसकी वजह है हॉस्पिटल के वातावरण में अदृश्य कीटाणु और विषाणु मौजूद रहते हैं जो टीबी, निमोनिया, खांसी, जुकाम, फंगल इंफेक्शन समेत दूसरी कई बीमारियों से स्वस्थ व्यक्ति को भी बीमार बना सकते हैं। यह बात एसएन मेडिकल कॉलेज में एयरबोर्न इंफेक्शन कंट्रोल विषय पर संपन्न हुई वर्कशॉप के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा अपने व्याख्यान में व्यक्त किए गए। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रो-बायलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर अंकुर गोयल ने कहा कि हॉस्पिटल में एयरबोर्न और ब्लडबोर्न से संक्रमित होने का खतरा अधिक होता है। पहले से प्रयोग की जा चुकी सिरिंज या फिर अन्य दूषित चीजों के कारण एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी का खतरा बना रहता है। वहीं आईसीयू, ओपीडी और वार्ड में कीटाणु व विषाणु अधिक होने के कारण लापरवाही के चलते मरीज और तीमारदार एकदूसरे से संक्रमित होने लगते हैं। 

  माइक्रो-बायलॉजी विभाग की डॉक्टर आरती अग्रवाल के कहा कि हॉस्पिटलों में कीटाणु और विषाणु मौजूद रहते हैं। जिन लोगों की इम्युनिटी पॉवर कमजोर होती है या फिर पहले से ही उन्हें कोई बीमारी होती है, जीवाणु और विषाणु के संपर्क में आकर टीबी, स्वाइन फ्ल्यू, फंगल इंफेक्शन, खांसी, जुकाम, बुखार आदि से पीड़ित हो सकते हैं। 

   वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर संतोष कुमार और डॉक्टर जीवी सिंह ने बताया कि टीबी के कीटाणुओं की वजह से मरीजों में मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस की परेशानी बढ़ रही है। ऐसे मरीजों के नजदीक आने या इनके संपर्क में रहने वाले तीमारदार व लोग भी टीबी के कीटाणुओं के संपर्क में आकर मरीज हो सकते हैं। 

   डॉक्टर नीतू चौहान और डॉक्टर प्रज्ञा शाक्य ने बताया कि हॉस्पिटल आने से पहले और हॉस्पिटल में आने के दौरान समुचित सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। मरीजों, तीमारदारों और हॉस्पिटल स्टाफ को अपने हाथों को समय समय पर सैनिटाइज करते रहने के साथ ही मुंह व नाक पर मास्क लगा कर रहना चाहिए। हॉस्पिटल के वार्ड, ओपीडी और आईसीयू में मेडिकल वेस्ट को मानक के अनुसार निस्तारण करने पर जोर देने की आवश्यकता है। 

   वर्कशॉप में डॉक्टरो ने सुझाव देते हुए कहा कि हॉस्पिटल को कीटाणुओं और विषाणुओं से मुक्त रखने के लिए अच्छी क्वालिटी के फिनायल से पोछा लगा कर स्वच्छ रखना चाहिए। मेडिकल स्टाफ को एयरबोर्न इंफेक्शन से बचाने के लिए ट्रेनिंग दी जाए। हॉस्पिटल के वार्ड, ओपीडी और आईसीयू में वेंटिलेशन की बेहतर व्यवस्था हो। हॉस्पिटल में आने वाले खांसी, जुकाम व बुखार के मरीजों और तीमारदारों के लिए अलग से जगह तय करना जरूरी है। हॉस्पिटल स्टाफ को अपने हाथों में ग्लब्स और चेहरे पर अच्छी क्वालिटी का मास्क पहन कर की रहना चाहिए। 

  वर्कशॉप में एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता, डॉक्टर टीपी सिंह, डॉक्टर बृजेश शर्मा, डॉक्टर संजीव लवानियां, डॉक्टर पारुल गर्ग, डॉक्टर अविजित कुमार, डॉक्टर अखिल प्रताप, डॉक्टर विकास कुमार आदि ने भी व्याख्यान दिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 



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