आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। झोलाछाप द्वारा बगैर किसी डिग्री व योग्यता के छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए स्टेरॉयड दवाओं के सेवन से किडनी, लिवर, ऑस्टियोपोरोसिस, हार्मोंस में गड़बड़ी, डायबिटीज, मुंहासे होना जैसी बीमारियों का खतरा तीन गुना तक रहता है। बचने के लिए सस्ते इलाज के चक्कर में झोलाछाप से इलाज कराने से बचने की जरूरत है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार झोलाछाप के यहां छापे मारकर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। छापे के दौरान झोलाछाप के अवैध क्लीनिक से काफी मात्रा में स्टेरॉयड और एंटीबायोटिक समेत अन्य कई दवाएं और इंजेक्शन बरामद हुए हैं। झोलाछाप द्वारा इनका उपयोग जोडों में दर्द भूख व वजन बढ़ाने, जुकाम, खांसी, बुखार उतारने आदि में किया जा रहा है। झोलाछाप इन्हें पीसकर पुड़िया बना कर मरीजों को देते हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि स्टेरॉयड और एंटीबायोटिक के मनमाने सेवन से मरीज को तत्काल आराम तो मिल जाता है, लेकिन लंबे समय तक इनके इस्तेमाल से किडनी व लिवर के फेल होने के साथ ही त्वचा व पेट के रोग, डायबिटीज, ऑस्टियोपोरोसिस, हार्मोंस में गड़बड़ी का खतरा बढ़ जाता है। जबकि स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल अति गंभीर मरीज का जीवन बचाने के लिए अंतिम विकल्प के रूप में कराया जाता है। ऐसे में मरीजों को झोलाछाप के यहां इलाज कराने से बचना चाहिए। मरीज निशुल्क इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल, एसएन मेडिकल कॉलेज में जाकर लाभ उठा सकते हैं।(न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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