@ ज्योतिष विज्ञान के अंतर्गत हाथों की रेखाओं का अध्ययन भी किया जाता है। इसमें हाथों की बनावट, अंगुलियों व अंगूठे की बनावट व ग्रह पर्वतों की स्थिति और हाथों की रेखाओं की जानकारी करके जातक के प्रश्न व समस्याओं का समाधान करने की कोशिश की जाती है। जातक के दोनों हाथों में अंगुलियों और अंगूठों के ठीक नीचे की ओर जो भाग ऊंचा या उठा हुआ होता है, उसे ग्रह पर्वत कहा जाता है।
@ हाथ के अंगूठे के नीचे का तीसरा पर्व शुक्र पर्वत का स्थान होता है। अंगूठे के पास वाली अंगुली तर्जनी कहलाती है। इसके ठीक नीचे का क्षेत्र बृहस्पति पर्वत का होता है। तर्जनी के बराबर वाली एवं सबसे बड़ी अंगुली मध्यमा होती है। इसके नीचे का क्षेत्र शनि पर्वत का कहलाता है। मध्यमा के बराबर की अंगुली अनामिका कहलाती है। इसके नीचे सूर्य पर्वत का क्षेत्र होता है। हाथ की सबसे छोटी अंगुली को कनिष्ठिका कहते हैं। इसके नीचे का क्षेत्र बुध पर्वत का माना जाता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल
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