आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। विभिन्न अपराधों के लिए जिला कारागार में निरुद्ध मजबूर बुजुर्ग बंदियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। इसके तहत बुजुर्ग बंदियों को एक ही बैरक में रखते हुए उन्हें आरामदायक गद्दे दिए गए हैं। साथ ही चलने फिरने के लिए लाठी और व्हील चेयर की व्यवस्था भी की गई है।
जिला कारागार अधीक्षक हरिओम शर्मा ने बताया कि मौजूदा समय में कारागार में 2350 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें 18 से 21 की उम्र वाले 60 बंदी हैं, जबकि 70 से अधिक उम्र के 55 बंदी शामिल हैं। इनमें ज्यादातर दहेज हत्या के आरोप में निरुद्ध हैं। कुछ बंदी सजायाफ्ता हैं। इन बंदियों को एक अलग बैरक में रखा गया है।
कारागार अधीक्षक ने बताया कि सर्दी के मौसम में बुजुर्ग बंदियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए विशेष एवं अलग से व्यवस्था की गई है। बुजुर्ग बंदियों की सहायता के लिए अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। हर दिन डॉक्टर उनका चेकअप करने के लिए आते हैं। अगर किसी बंदी को उपचार की जरूरत होती है तो उसे कारागार अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता है।
कारागार अधीक्षक ने बताया कि उत्तर प्रदेश की कारागारों में बंदियों की बैरक आवंटित करने की नई व्यवस्था लागू की गई है। जिसके तहत बंदियों के नाम के अंग्रेजी के पहले अक्षर के अनुसार बैरक दी जाती है। कारागार में पहली बार आने वाले बंदियों को बैरक नंबर नौ में दस दिन तक रखा जाता है। इसके बाद बैरक आवंटित होती है। अगर कोई बुजुर्ग और बेटे साथ आते हैं तो उन्हें एक साथ बैरक में रखा जाता है।
कारागार अधीक्षक ने बताया कि कारागार में बंदियों को सुधारने की कोशिश भी चल रही है। कोई भी बंदी हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा से लेकर कोई भी अन्य कोर्स कर सकता है। कारागार प्रशासन द्वारा 18 से 21 की उम्र सीमा वाले बंदियों को आदतन अपराध करने वाले बंदियों से अलग बैरक में रखा जाता है। उनके सुधार के लिए शिक्षा की व्यवस्था भी की जाती है। जिससे कि कारागार से छूटने के बाद वे अपने जीवन को बेहतर और शांतिपूर्ण तरीके से जी सकें। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)
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