वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन के मुख्य द्वार के समक्ष बड़े पेड़, खंबा, कुआं, किसी देवता का मंदिर, सदैव पानी बहना और कीचड़ का रहना द्वार वेध माना गया है। इसके अलावा भवन के मुख्य द्वार पर मार्ग का सीधे आकर समाप्त होना भी द्वार वेध कहलाता है।
भवन में द्वार वेध होने से शारीरिक व मानसिक रोग, धन की बरबादी, बच्चों के विकास में बाधा, परिवार में शोक और कई अन्य समस्याओं के आने की संभावना बनी रहती है। निवारण के लिए द्वार वेध को हटाया जाना ही सर्वश्रेष्ठ उपाय है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष-वास्तु लेखक एवं सलाहकार, आगरा।
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