सोमवार, 11 मार्च 2024

दवाओं के दुष्प्रभाव और तेज आवाज से कमजोर हो रही है सुनने की क्षमता

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। मनमाने ढंग से ली जाने वाली दवाओं के दुष्प्रभाव और तेज आवाज की वजह से युवाओं में सुनने की क्षमता में कमी आ रही है। इन्हें ऊंचा सुनाई दे रहा है। साथ ही चिड़चिड़ापन भी बढ़ रहा है। 

    एसएन मेडिकल कॉलेज के नाक, कान व गला रोग विभागाध्यक्ष डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रशिक्षित डॉक्टर की जगह किसी झोलाछाप से इलाज कराने, खुद ही मनमाने ढंग से दवाओं का सेवन करने और गलत इंजेक्शन लगवाने के कारण कान में संक्रमण, दर्द, सूजन, सुन्नपन जैसी परेशानी पनप रही हैं। बच्चों के कान में तेल डालने से भी यह समस्या हो रही है। 

   डॉक्टर सलोनी सिंह बघेल ने बताया कि ईयरफोन का लगातार उपयोग करने, तेज आवाज में संगीत सुनने और ज्यादा शोरगुल वाली जगह पर रहने की वजह से नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे ऊंचा सुनने और चिड़चिड़ापन की समस्या बढ़ जाती है। सामान्य तौर पर चालीस से पचास डेसिबल ध्वनि का स्तर कानों के लिए सही माना जाता है। इससे ज्यादा ध्वनि का स्तर कान व सिर में दर्द की वजह बनता है। 

    डॉक्टरों का कहना है कि कानों के स्वास्थ्य के लिए ईयरफोन का उपयोग कम करें, तेज आवाज में संगीत न सुनें, वाहनों का हॉर्न कम बजाएं, कारखानों में मशीनों की ध्वनि को नियंत्रित रखें। कान में तेल डालने से बचें और नहाते व तैरते समय कान में पानी न जाने दें। कान में किसी तरह की तकलीफ होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से ही इलाज कराएं। बुजुर्गों के कानों की जांच कराते हुए सुनने की मशीन लगवाएं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)

शनिवार, 2 मार्च 2024

बदलते मौसम में रखें सेहत का ध्यान

आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। कभी गर्मी तो कभी सर्दी, ये है बदलते मौसम की खास बात। ऐसे में रहन-सहन और खानपान में जरा सी भी लापरवाही बरती नहीं कि बीमार होते देर नहीं लगेगी। बदलते मौसम के चलते लोगों में बुखार, खांसी, जुकाम, सीने में जकड़न, गले में खराश, सिर, आंख व मांसपेशियों में दर्द, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। 

      डॉक्टरों की मानें तो इन दिनों अधिकांश ने धूप निकलने पर गर्म कपड़े उतार कर रख दिए, हवा में घूमें, ठंडे पानी से स्नान किया और आइसक्रीम एवं कोल्डड्रिंक का सेवन किया। बदलते मौसम का असर छोटे बच्चों पर भी पड़ रहा है। बच्चों में निमोनिया, बुखार पसली चलने, सीने में बलगम जमा होने के लक्षण मिल रहे हैं। 

    डॉक्टरों के अनुसार बदलते मौसम में गर्म कपड़े पहनकर रहें, गुनगुने पानी से स्नान करें, गुनगुना पानी पीएं, वायरल बुखार होने पर पैरासिटामाल लें, आइसक्रीम और कोल्डड्रिंक लेने से बचें। अपनी मर्जी से घर में रखे बुखार व खांसी के सिरप बच्चों को नहीं दें। सीने में कफ जमा होने या घरघराहट होने पर पानी की भाप ली जा सकती है। दमा के मरीज इनहेलर की डोज पहले ही की तरह लेते रहें। 

   क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा विभाग के डॉक्टर लोकेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बदलते मौसम का असर ऐसे लोगों पर ज्यादा होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में गिलोय, घनवटी, तुलसी, लंवंगादि वटी, कंठ सुधार वटी जैसी औषधियों के सेवन से वायरल बुखार, जुकाम, खांसी, गले में दर्द आदि में फायदा पहुंचता है। इसके अलावा गुनगुने पानी में सेंधा नमक व हल्दी मिला कर दो बार गरारे करने और शहद में अदरक का रस मिला कर पीने से आराम मिलेगा। 

    डॉक्टर सिंह ने बताया कि इस मौसम में मेथी, बथुआ, पालक, गाजर, अदरक, लहसुन, संतरा, नीबू, अंगूर, बादाम, काजू, अखरोट आदि का सेवन अवश्य करना चाहिए। दूध, गुड़, टमाटर सूप, आयुष काढ़ा का इस्तेमाल करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। बदलते मौसम में लस्सी, आइसक्रीम, शीतल पेय, कच्ची बर्फ, ज्यादा मिर्च मसाले वाले आहार के सेवन से बचना चाहिए। (न्यूज़लाइन ब्यूरो) 

जनपद न्यायालय आगरा में 22 फरवरी को लगेगा वृहद विधिक साक्षरता सेवा शिविर

                        प्रमोद कुमार अग्रवाल   राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ क...