आगरा (प्रमोद कुमार अग्रवाल)। मनमाने ढंग से ली जाने वाली दवाओं के दुष्प्रभाव और तेज आवाज की वजह से युवाओं में सुनने की क्षमता में कमी आ रही है। इन्हें ऊंचा सुनाई दे रहा है। साथ ही चिड़चिड़ापन भी बढ़ रहा है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के नाक, कान व गला रोग विभागाध्यक्ष डॉक्टर धर्मेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रशिक्षित डॉक्टर की जगह किसी झोलाछाप से इलाज कराने, खुद ही मनमाने ढंग से दवाओं का सेवन करने और गलत इंजेक्शन लगवाने के कारण कान में संक्रमण, दर्द, सूजन, सुन्नपन जैसी परेशानी पनप रही हैं। बच्चों के कान में तेल डालने से भी यह समस्या हो रही है।
डॉक्टर सलोनी सिंह बघेल ने बताया कि ईयरफोन का लगातार उपयोग करने, तेज आवाज में संगीत सुनने और ज्यादा शोरगुल वाली जगह पर रहने की वजह से नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे ऊंचा सुनने और चिड़चिड़ापन की समस्या बढ़ जाती है। सामान्य तौर पर चालीस से पचास डेसिबल ध्वनि का स्तर कानों के लिए सही माना जाता है। इससे ज्यादा ध्वनि का स्तर कान व सिर में दर्द की वजह बनता है।
डॉक्टरों का कहना है कि कानों के स्वास्थ्य के लिए ईयरफोन का उपयोग कम करें, तेज आवाज में संगीत न सुनें, वाहनों का हॉर्न कम बजाएं, कारखानों में मशीनों की ध्वनि को नियंत्रित रखें। कान में तेल डालने से बचें और नहाते व तैरते समय कान में पानी न जाने दें। कान में किसी तरह की तकलीफ होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से ही इलाज कराएं। बुजुर्गों के कानों की जांच कराते हुए सुनने की मशीन लगवाएं। (न्यूज़लाइन ब्यूरो)