## मकान की उत्तर-पूर्व विदिशा यानि ईशान कोण में किसी भी तरह का निर्माण या टॉयलेट का होना दांपत्य जीवन के लिए अशुभ होता है। यहां तक कि इस वजह से विवाह टूटने की नौबत आ जाती है। इसलिए इस कोण को सदैव खुला और स्वच्छ रखना आवश्यक है।
## मकान के आग्नेय कोण यानि दक्षिण-पूर्व विदिशा में गर्भवती महिला को कभी नहीं सुलाना चाहिए अन्यथा उस महिला में अनिद्रा एवं गर्भपात होने का अंदेशा बना रहेगा। जगह की कमी हो तो आग्नेय कोण से हटकर दक्षिण की दीवार की तरफ सुला सकते हैं।
## मकान की पूर्व में सीढ़ियों का होना भी शुभ नहीं होता। इस दोष के कारण आर्थिक नुकसान के साथ-साथ परिवार के सदस्यों में मानसिक तनाव होता है। सीढ़ियों के लिए और कहीं जगह न हो तो पूर्व दिशा की दीवार और सीढ़ियों के बीच कम से कम तीन इंच का गैप कर देना चाहिए।
## मकान की दक्षिण-पश्चिम विदिशा यानि नैऋत्य कोण में मुख्य प्रवेश द्वार (मेन गेट) का होना वास्तु दोष है। ऐसा होने से अनावश्यक खर्चा होता है, साथ ही घर के मुखिया का मन भी घर में नहीं लगता। इस दोष से बचने के लिए मुख्य द्वार पर दहलीज बनवा कर उसके नीचे चांदी की पत्ती और नौ छोटे पिरामिड लगवा देने चाहिए।
## बॉक्स वाले पलंग या बेड में केवल ओढ़ने व बिछाने वाले कपड़े ही रखने चाहिए। पलंग के बॉक्स के अंदर किसी भी तरह का कबाड़, पुराने कपड़े, बिजली के खराब उपकरण, टूटे बर्तन, रद्दी अखबार आदि रखने से परिवार में कलह व मानसिक रोग होने की संभावना बनी रहती है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा।
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